क‍िस अनुरोध के ल‍िए ट्रंप ने ईरान और उसके नेताओं का जताया आभार? जानें क्‍या है मामला

नई द‍िल्‍ली, 22 अप्रैल . ईरान और उसके नेताओं का आभार जताते हुए अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने बताया क‍ि ईरान ने आठ महिला प्रदर्शनकारियों को दी जाने वाली फांसी टाल दी है. ट्रंप ने इसे “बहुत अच्छी खबर” बताते हुए कहा कि उनके अनुरोध पर ईरान ने सजा में बदलाव किया है.

President डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीड‍िया अकाउंट ट्रुथ सोशल पर कहा, ”बहुत अच्छी खबर. मुझे अभी-अभी सूचना मिली है कि ईरान में आज रात जिन आठ महिला प्रदर्शनकारियों को फांसी दी जानी थी, उन्हें अब फांसी नहीं दी जाएगी. चार को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा और चार को एक महीने की जेल की सजा सुनाई जाएगी. मैं ईरान और उसके नेताओं का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के President के रूप में मेरे अनुरोध का सम्मान किया और फांसी को रद्द कर दिया. इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!”

अमेरिका के President डोनाल्ड ट्रंप ने Tuesday को ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट किए, इनमें आठ महिलाओं की तस्वीरें थी, जिन्हें वायरल पोस्ट्स के अनुसार तेहरान सजा देने वाला था. ट्रंप ने एक पोस्ट साझा करते हुए अपील की थी कि इन्हें रिहा कर दिया जाए और ये भी कि वार्ता का ये सटीक आगाज होगा.

एक द‍िन पहले Tuesday को ट्रंप ने पोस्‍ट में लिखा, ”अगर आप इन महिलाओं को रिहा कर दें, तो मुझे बहुत खुशी होगी. मुझे यकीन है कि आप ऐसा करेंगे. अगर ऐसा करेंगे तो उनकी नजरों में आपका सम्मान बढ़ जाएगा. कृपया उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाएं. यह हमारी बातचीत की एक बेहतरीन शुरुआत होगी.”

जिस वायरल पोस्ट को शेयर किया गया, उसमें आठ युवतियों की तस्वीर थीं. इसमें बीता हेम्मती, गजल गलंदरी, गोलनाज नराघी, वीनस हुसैन नेजाद, पनाह मोवाहेदी, एंसियेह नेजाती, महबूबेह शबानी और डायना ताहेर अबादी शामिल थीं.

माना जाता है कि हेम्मती ईरान की पहली महिला प्रदर्शनकारी (जनवरी विद्रोह) हैं जिनकी मौत का फरमान सुनाया गया है. न्यूयॉर्क स्थित एक यहूदी मानवाधिकार गैर-लाभकारी संगठन, लॉफेयर प्रोजेक्ट, ने इसकी जानकारी दी.

ईरान के नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस के अनुसार, उन पर तेहरान में ईरानी शासन के खिलाफ जनवरी में हुए विद्रोह को भड़काने का आरोप है.

द टेलीग्राफ के अनुसार, हुसैन नेजाद को ईरानी सुरक्षा बलों ने उनके कार्यस्थल से गिरफ्तार किया था. उन पर भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने का आरोप लगाया गया.

फेमेना मानवाधिकार समूह के अनुसार, नराघी तेहरान के एक अस्पताल में 37 वर्षीय इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञ हैं, और उन्हें जनवरी में सुरक्षा बलों ने अपने कब्जे में लिया. हेंगाव मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, शबानी पर घायल प्रदर्शनकारियों की मदद करने का आरोप है और उन्हें फरवरी में गिरफ्तार किया गया था.

social media रिपोर्टों के अनुसार, नेजाती को जनवरी में हिरासत में लिया गया था और वह पांच साल के एक बच्चे की मां हैं. वहीं इन आठ में से दो नाबालिग बताई जा रही हैं.

एवाई/एबीएम