राजस्थान से कभी काम के सिलसिले में बंगाल गए पांच भाजपा उम्मीदवार भी विधानसभा पहुंचे

jaipur, 5 मई . पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा के पांच ऐसे उम्मीदवार भी जीते हैं जो दशकों पहले रोजगार की तलाश और अपने व्यवसायों के विस्तार के लिए Rajasthan से वहां गए थे. इस बार के चुनाव परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रवासी Rajasthan ी समुदायों के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है.

Rajasthan मूल के इन नेताओं में विजय ओझा, India कुमार झंवर, अजय कुमार पोद्दार, राजेश कुमार और अशोक कीर्तनिया शामिल हैं.

विजय ओझा मूल रूप से बीकानेर के रहने वाले हैं. उन्होंने 5,797 वोटों से बंगाल की जोरासांको सीट पर जीत हासिल की. ​​कोलकाता के लंबे समय से निवासी रहे विजय ओझा 15 साल से भी ज्यादा समय तक म्युनिसिपल काउंसलर के तौर पर भी काम कर चुके हैं.

Rajasthan के अन्य विजयी नेताओं में India कुमार झंवर शामिल हैं, जिन्होंने बेलडांगा से 13,208 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. अजय कुमार पोद्दार ने कुल्टी सीट 26,498 वोटों के अंतर से जीती. राजेश कुमार ने जगतदल से 20,909 वोटों से जीत दर्ज की और अशोक कीर्तनिया इन सभी में सबसे बड़े विजेता बनकर उभरे, जिन्होंने बनगांव उत्तर से 40,670 वोटों से जीत हासिल की.

इन पांचों नेताओं के Rajasthan से पुराने संबंध हैं, लेकिन इन्होंने अपना Political करियर पश्चिम बंगाल में बनाया और अपने गृह राज्य के साथ मजबूत सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्ते बनाए रखे.

इन नेताओं ने समर्थन जुटाने के लिए अपने गहरे सामुदायिक नेटवर्क, स्थानीय पहुंच और जमीनी मुद्दों की अपनी समझ का भरपूर इस्तेमाल किया.

भाजपा ने Rajasthan से जुड़े 9 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. इनमें से पांच उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, जो उनके अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जमीनी जुड़ाव और लगातार की गई Political मेहनत को दर्शाता है.

भवानीपुर जैसे हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा ने चुनाव प्रचार के प्रबंधन के लिए Rajasthan से नेताओं की एक समर्पित टीम तैनात की.

वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में इस टीम ने सूक्ष्म-स्तरीय जनसंपर्क पर ध्यान केंद्रित किया, विशेष रूप से घर-घर जाकर प्रचार करने और कल्याणकारी संदेशों के माध्यम से युवा और महिला मतदाताओं को लक्षित किया. अपनी जीत के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने Rajasthan के नेताओं के योगदान को स्वीकार किया और उनके संगठनात्मक प्रयासों तथा जमीनी स्तर पर समन्वय की सराहना की.

Rajasthan मूल के इन उम्मीदवारों की सफलता क्षेत्रीय राजनीति की बदलती गतिशीलता को उजागर करती है, जहां प्रवासी समुदाय अपने गृह राज्यों से बाहर भी चुनावी परिणामों को तेज़ी से प्रभावित कर रहे हैं.

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