
श्रीनगर, 4 जुलाई . जम्मू-कश्मीर में स्कूली पुस्तकालयों में कथित तौर पर अलगाववादियों और आतंकवादियों का महिमामंडन करने वाली किताब के मामले में Government ने बड़ा प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाया है. विवादित पुस्तकों को मंजूरी देने में कथित लापरवाही बरतने वाले आठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. साथ ही, मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं और संबंधित प्रकाशकों के ठिकानों पर छापेमारी भी की जा रही है.
इस मामले में जम्मू के काउंटर इंटेलिजेंस Police स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 49, 61(2), 152, 196 और 353 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13 के तहत First Information Report संख्या 3/2026 दर्ज की गई है. जांच एजेंसियों ने प्रकाशकों के परिसरों पर छापेमारी कर अब तक फिजिकल और डिजिटल दोनों प्रकार के साक्ष्य जब्त किए हैं.
विवाद के केंद्र में दो पुस्तकें हैं. पहली, ‘पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर’, जिसके लेखक हिलाल अहमद और संतोष मीणा हैं और इसे ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू ने प्रकाशित किया है. दूसरी पुस्तक ‘पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’ है, जिसके लेखक डॉ. सुशांत गिरी हैं और इसे अनुराग प्रकाशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है. इन पुस्तकों पर अलगाववादियों और आतंकवादियों का महिमामंडन करने का आरोप लगाया गया है.
सरकारी आदेश के अनुसार, पहली पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में, जबकि दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला जिलों में वितरित की गई थीं. Government का कहना है कि इन पुस्तकों में ऐसी सामग्री शामिल है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है. आदेश में कहा गया है कि पुस्तकों की सिफारिश करने वाली उपसमिति और संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही बरती और आवश्यक सतर्कता नहीं दिखाई.
निलंबित अधिकारियों में फजिल इमरान सिद्दीकी, गुरजीत सिंह, संजीव शर्मा, शाजिया कौसर, इम्तियाज अहमद मीर, निरंजन शर्मा, रेनू मेंगी और राजमोहिनी शामिल हैं. इसके अलावा, समग्र शिक्षा में अनुबंध पर कार्यरत कंप्यूटर असिस्टेंट शेख सुहेल अहमद की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं.
Government ने इस मामले की जांच के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अश्वनी कुमार को जांच अधिकारी और जेकेएएस अधिकारी रोहित शर्मा को प्रेजेंटिंग ऑफिसर नियुक्त किया है. जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.
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एससीएच/एमएस
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