
वाशिंगटन, 29 मई . अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संयुक्त राज्य अमेरिका को दुनिया की अग्रणी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पावर घोषित करते हुए तर्क दिया कि चीन अभी भी काफी पीछे है. वाशिंगटन इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रतिस्पर्धाओं में से एक में अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
व्हाइट हाउस ब्रीफिंग के दौरान बेसेंट ने कहा, “अमेरिका विश्व में एआई का अग्रणी देश है. हम एक एआई महाशक्ति हैं. चीन दूसरे स्थान पर है, लेकिन काफी पीछे है.”
बेसेंट ने कहा कि प्रशासन अग्रणी अमेरिकी एआई कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है, क्योंकि नीति निर्माता नवाचार और सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “हम बड़ी भाषा प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. वे बेहतरीन साझेदार साबित हुए हैं. हम एक ऐसा समाधान निकालेंगे, जो अधिकतम गणना का हल प्रदान करेगा.”
उनकी ये टिप्पणियां उन्नत एआई मॉडलों से उत्पन्न जोखिमों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सरकारी उपायों की आवश्यकता से संबंधित प्रश्नों के जवाब में आईं.
कठोर प्रतिबंधों का संकेत देने के बजाय, बेसेंट ने सुरक्षा चिंताओं को दूर करते हुए अमेरिका की अग्रणी स्थिति को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा, “”हम नवाचार और सुरक्षा के बीच सटीक संतुलन पर काम कर रहे हैं और हम इसे सर्वोत्तम बनाना चाहते हैं.”
बेसेंट ने संघीय Government और प्रमुख एआई डेवलपर्स के बीच सहयोग पर भी प्रकाश डाला.
उन्होंने कहा, “बड़े भाषा मॉडल विकसित करने वाली सभी प्रयोगशालाओं के बीच और साथ ही अमेरिकी Government और प्रयोगशालाओं के बीच भी हमारा उत्कृष्ट सहयोग है.”
उनके बयान इस बात को रेखांकित करते हैं कि एआई वाशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापक रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता का एक केंद्रीय मोर्चा बन गई है.
अमेरिकी अधिकारी एआई में नेतृत्व को न केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा के लिए बल्कि सैन्य क्षमताओं, साइबर सुरक्षा, उन्नत विनिर्माण और भविष्य में उत्पादकता वृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण मानते हैं.
यह बहस तब और तेज हो गई है जब दुनिया भर की Governmentें तेजी से शक्तिशाली हो रही एआई प्रणालियों को विनियमित करने के तरीकों को लेकर जूझ रही हैं, साथ ही यह सुनिश्चित कर रही हैं कि घरेलू कंपनियां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनी रहें.
संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और उन्नत कंप्यूटिंग अवसंरचना में भारी निवेश कर रहे हैं. दोनों देश उन प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व हासिल करना चाहते हैं, जिनसे आने वाले दशकों तक वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार मिलने की उम्मीद है.
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ओपी/एएस
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