
मॉन्टेरी, 30 जून . नीदरलैंड के कोच रोनाल्ड कोमैन ने Tuesday को मोरक्को से पेनल्टी शूटआउट में टीम के हारने और फीफा विश्व कप से बाहर होने के बाद बतौर कोच अपने भविष्य पर संदेह जताया. उन्होंने कहा कि वह अभी भी मॉन्टेरी स्टेडियम में आए परिणाम से उबर रहे हैं.
शिन्हुआ के मुताबिक कोमैन ने कहा, “मैंने हार नहीं मानी है. मैं अपने भविष्य के बारे में सोचूंगा. मैच की निराशा अभी भी बहुत ताजा है. मैं सोचूंगा और शायद कल सुबह तक किसी नतीजे पर पहुंचूंगा.”
कोमैन ने कहा, “हमने जब मोरक्को को अपने ग्रुप में देखा, उसी पल से यह एक मुश्किल ड्रॉ था, लेकिन यही फुटबॉल है. हमने इस मैच में बहुत ऊर्जा लगाई. मोरक्को ने हमसे बेहतर मौके बनाए. हमने बढ़त बना ली. मुझे नहीं लगा कि उनके पास कोई असली हल है. उन्होंने किस्मत से एक गोल कर दिया. स्टॉपेज टाइम में यह और भी दर्दनाक होता है. हम पेनल्टी शूटआउट में भी बदकिस्मत थे.”
कोमैन ने पांच लोगों के डिफेंस पर स्विच करने के अपने फैसले का बचाव किया और इस बात से इनकार किया कि उनकी रणनीति रक्षात्मक थी.
उन्होंने कहा, “हमने स्वीडन और ट्यूनीशिया के मुकाबले बहुत कम गोल खाए. अगर बराबरी का गोल नहीं हुआ होता, तो लोग शायद इस फैसले की तारीफ करते. मुझे लगा कि यह बदलाव जरूरी था. पिछले मैचों में हमने अक्सर विपक्षी को बहुत ज्यादा मौके दिए. अगर आज रात ऐसा होता तो शायद हम अतिरिक्त समय तक भी नहीं पहुंच पाते. लोग बाहर से मैच देखते हैं. मैं हर दिन टीम के साथ रहता हूं. मुझे यह दोबारा करना पड़े, तो मैं कुछ भी नहीं बदलूंगा.”
हालांकि कोमैन ने माना कि आक्रमण में उनकी टीम की कमियां असर डाल रही थीं.
उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि हम मिकी और कोडी के साथ लेफ्ट में और ज्यादा खतरनाक हो सकते थे. हम गेंद को और तेजी से मूव कर सकते थे. हम कुछ बार राइट में अच्छी पोजिशन में पहुंचे, लेकिन फाइनल पास अच्छा नहीं था.”
फीफा विश्व कप के इतिहास में नीदरलैंड तीन बार फाइनल (1974, 1978, 2010) में पहुंची है, लेकिन तीनों बार उसे हार का सामना करना पड़ा है. विश्व कप 2026 से बाहर होने के बाद खिताब जीतने का नीदरलैंड का इंतजार कम से कम 4 साल तक और बढ़ गया है.
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पीएके
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