
गाजियाबाद, 5 जुलाई . उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में चलती कार के अंदर पोर्टेबल मशीन से अवैध भ्रूण लिंग जांच का खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. शहर में खुलेआम कार के अंदर लिंग जांच का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था. इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
मुखबिर की सूचना पर Saturday देर रात स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए कार संख्या यूपी 14 एफएल 9355 को कोतवाली थाना क्षेत्र में रोककर अवैध भ्रूण लिंग जांच का भंडाफोड़ किया. कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए भ्रूण का लिंग बताए जाने का आरोप है. मौके से संदीप, सलमान, शाहिद और तस्लीम को हिरासत में लिया गया है.
इस कार्रवाई से एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि अगर शहर में चलती कार के अंदर अवैध लिंग जांच का गिरोह सक्रिय था, तो आखिर स्वास्थ्य विभाग की नियमित निगरानी और पीसीपीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक) सेल की जांच व्यवस्था क्या कर रही थी? बिना किसी सूचना के यह नेटवर्क कब से संचालित हो रहा था और अब तक विभाग की नजर से कैसे बचा रहा?
सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी संदीप के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं. इसके बावजूद अगर वह इस तरह का अवैध कारोबार चला रहा था तो विभाग की निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
इस मामल पर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है. Police और स्वास्थ्य विभाग आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं तथा कितने समय से यह अवैध धंधा चल रहा था.
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एसडी/एएस
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