जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर की आशंका, एआईएमआईएम ने अखिलेश यादव को घेरा

Lucknow, 16 जुलाई . रामपुर जिला प्रशासन (आरडीए) द्वारा जौहर विश्वविद्यालय को जारी किए गए विध्वंस नोटिस पर असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने कड़ी आलोचना की है.

एआईएमआईएम ने सत्तारूढ़ भाजपा Government और Samajwadi Party के सुप्रीमो अखिलेश यादव पर अल्पसंख्यक संस्थान को गिराने के लिए मिलीभगत का आरोप लगाया है.

एआईएमआईएम के प्रवक्ता शादाब चौहान ने कहा कि Samajwadi Party की Government ने इसके निर्माण के दौरान एक खामी छोड़ दी थी और उसी का फायदा उठाकर मौजूदा भाजपा Government इसे ध्वस्त करने पर तुली हुई है. यह सब अखिलेश यादव की पूर्ण सहमति से हो रहा है.

उन्होंने अखिलेश यादव पर भाजपा Government के साथ मिलीभगत करने और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े कई मुद्दों पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सुप्रीमो ने कभी भी अल्पसंख्यकों और उनके अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाई, बल्कि मुस्लिम समुदाय को सिर्फ एक ‘वोट बैंक’ के रूप में इस्तेमाल किया.

एआईएमआईएम नेता ने कहा कि विश्वविद्यालय को जानबूझकर अखिलेश यादव की विदेश यात्रा के समय ध्वस्त किया गया ताकि अखिलेश यादव दोषमुक्त हो सकें.

उन्होंने कहा कि यह सब अखिलेश यादव की मिलीभगत से हो रहा है. मैंने सुना है कि वे विदेश में हैं, इसलिए विधानसभा में 100 विधायकों की संख्या होने के बावजूद उनकी पार्टी कोई आंदोलन नहीं करेगी.

उन्होंने आगे दावा किया कि राज्य में जब भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार होते हैं, अखिलेश और उनके पार्टी के लोग न तो कोई बयान जारी करते हैं और न ही इन अत्याचारों के खिलाफ विरोध करते हैं.

उन्होंने कहा कि चाहे मुठभेड़ हो, मॉब लिंचिंग हो या बुलडोजर कार्रवाई, Samajwadi Party के पास सांसदों और विधायकों की अच्छी खासी संख्या होने के बावजूद उसने कभी भी अल्पसंख्यकों की आवाज को बुलंद नहीं किया है.

उन्होंने आगे कहा कि उनके लिए मुसलमान सिर्फ एक वोट बैंक हैं.

रामपुर के मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर Wednesday को विवाद तब भड़क उठा जब रामपुर जिला प्रशासन (आरडीए) ने आजम खान द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय की 40 इमारतों में से 38 को बिना स्वीकृत भवन योजनाओं के निर्मित पाए जाने के बाद ध्वस्त करने का आदेश जारी किया.

एआईएमआईएम के प्रवक्ता ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय में इमारतों को गिराने का नोटिस अल्पसंख्यक समुदाय पर एक बड़ा हमला है और उन्होंने सवाल उठाया कि अधिकारियों और पदाधिकारियों की कथित मिलीभगत और संलिप्तता पर चुप्पी क्यों साधे रखी गई है.

उन्होंने पूछा कि क्या उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जो इमारतों के निर्माण के समय प्रभारी थे?

उन्होंने कहा कि भाजपा Government अखिलेश यादव के साथ मिलीभगत करके विश्वविद्यालय को नष्ट करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब Government नए संस्थान स्थापित करने में सक्षम नहीं है तो मौजूदा अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को ध्वस्त करने का उसका इरादा क्या है. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यह Government के अपने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प के अनुरूप है.

एमएस/