फाल्टा पुनर्मतदान: जहांगीर के नाम वापस लेने पर भाजपा और माकपा ने टीएमसी को कहा ‘कायर’; सपा ने फैसले का किया समर्थन

New Delhi, 19 मई . पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में होने वाले पुनर्मतदान (रिपोल) से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान के चुनाव मैदान से हटने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है.

भाजपा और माकपा (सीपीआई-एम) ने तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उसे ‘डरपोक’ और ‘भागने वाली पार्टी’ करार दिया है. वहीं, ‘इंडिया ब्लॉक’ की सहयोगी Samajwadi Party ने तृणमूल के इस फैसले का समर्थन किया है.

Tuesday को पुनर्मतदान प्रचार के आखिरी दिन जहांगीर खान ने अचानक घोषणा करते हुए कहा, “मैं यह चुनाव नहीं लड़ रहा हूं.” उनके इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस को निशाने पर लेना शुरू कर दिया.

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “तृणमूल कांग्रेस एक डरपोक, भागने वाली और आत्मसमर्पण करने वाली पार्टी है. बंगाल चुनाव में जनता का मूड और माहौल देखकर उनके उम्मीदवार ने चुनाव से पीछे हटने का फैसला किया.”

उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस केवल लोगों को डराकर चुनाव जीतना चाहती थी, लेकिन इसमें सफल नहीं हो सकी.

वहीं, माकपा नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा कि विकास के लिए संघर्ष करना जरूरी होता है. उन्होंने कहा, “संघर्ष से भागने से विकास नहीं होता. हमारी पार्टी छोटी है और हम हर दिन हमलों का सामना कर रहे हैं, फिर भी हमने अपना उम्मीदवार उतारा है. नतीजा चाहे जो भी हो, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है.”

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “जब समय अच्छा होता है तो वे सबसे आगे रहते हैं, लेकिन मुश्किल समय आते ही भाग जाते हैं. यही तृणमूल कांग्रेस का चरित्र है.”

इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के नेता नौशाद सिद्दीकी ने जहांगीर खान के चुनाव से हटने के पीछे तीन संभावित वजहें बताईं. उन्होंने कहा, “पहला कारण यह हो सकता है कि उन्होंने खुद पीछे हटने का फैसला किया हो. दूसरा, वह भाजपा को आसान जीत देने का संकेत दे रहे हों. तीसरा कारण तृणमूल कांग्रेस के भीतर का आंतरिक विवाद हो सकता है.”

नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि विधानसभा चुनाव में तृणमूल की हार को अभी एक महीना भी नहीं हुआ है और अब कोई रिपोल लड़ने तक को तैयार नहीं है. उन्होंने दावा किया कि अगर जहांगीर खान चुनाव लड़ते तो चौथे या पांचवें स्थान पर रहते, जो पार्टी के लिए बड़ी शर्मिंदगी होती.

हालांकि, Samajwadi Party के नेता एसटी हसन ने तृणमूल उम्मीदवार के फैसले का समर्थन किया. उन्होंने कहा, “अब चुनावों की कोई प्रासंगिकता नहीं बची है. चुनावों में धांधली हो रही है और चुनाव आयोग खुद एक Political पार्टी की तरह काम कर रहा है.”

उन्होंने आगे कहा, “फिर चुनाव कराने का क्या मतलब है? भाजपा खुद को सर्वसम्मति से विजेता घोषित कर दे.” एसटी हसन ने दावा किया कि रिपोल में जहांगीर खान की हार तय थी.”

डीकेपी