
वाशिंगटन, 18 जुलाई . अमेरिका के President डोनाल्ड ट्रंप ने 2020 के President चुनाव में चीन की जासूसी और ईरान-रूस की सेंधमारी का खुलासा किया. ट्रंप ने सेव अमेरिका एक्ट पारित करने के लिए कांग्रेस से समर्थन भी मांगा. इन सबके बीच Political गलियारे की हलचल बढ़ी हुई है. डेमोक्रेट्स पार्टी के सभी नेताओं ने President ट्रंप पर चौतरफा निशाना साधा. President के काउंसलर पीटर नवारो ने ट्रंप का समर्थन किया और चुनावी व्यवस्था को इसका जिम्मेदार ठहराया.
सेव अमेरिका एक्ट को लेकर अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के काउंसलर पीटर नवारो ने कहा, “अगर सेव अमेरिका एक्ट पास हो जाता है, जिसमें वोटर आईडी, नागरिकता का सबूत जरूरी होगा और एब्सेंटी बैलेट के लापरवाही से इस्तेमाल पर रोक लगेगी तो देश में ज्यादा सुरक्षित चुनाव होंगे और ज्यादा ईमानदारी होगी. सबसे जरूरी बात यह है कि अमेरिकी लोगों का चुनावी प्रक्रिया पर ज्यादा भरोसा होगा और उनके वोट देने की संभावना ज्यादा होगी.”
अमेरिकी President के बयान को लेकर उन्होंने कहा, “कल रात जो कुछ हुआ, उसका मकसद उन जानकारियों को सार्वजनिक कर लोगों को जागरूक करना था, जिन्हें पहले गोपनीय रखा गया था. मेरी राय में इन सूचनाओं को कभी गोपनीय नहीं रखा जाना चाहिए था. President डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें इसलिए जारी किया ताकि अमेरिकी जनता देश की चुनावी प्रणाली में मौजूद कमजोरियों को बेहतर ढंग से समझ सके. इस दिशा में ‘सेव अमेरिका एक्ट’ सबसे अहम कदम है.”
President के काउंसलर ने कहा कि मुझे लगता है कि ये अलग-अलग मुद्दे हैं. चीन ने जैसा कि उम्मीद थी, हर बात से इनकार किया है, जिसकी आप उम्मीद करेंगे. यह चीन के बारे में कहानी नहीं है. यह हमारे चुनावों की ईमानदारी को सुरक्षित रखने में अमेरिकी Political प्रणाली की नाकामी के बारे में है. मेरे हिसाब से ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कुछ घरेलू लोग चाहते थे कि 2020 के चुनाव का नतीजा वोटरों की उम्मीद से अलग हो.
व्हाइट हाउस से राष्ट्र के नाम टेलीविजन पर प्रसारित संबोधन में Friday देर रात (स्थानीय समय) को अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव सुरक्षा से जुड़े खुफिया दस्तावेजों को तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक करने की घोषणा की. उन्होंने दावा किया कि इन दस्तावेजों से अमेरिका की चुनावी व्यवस्था में चौंकाने वाली कमियां सामने आई हैं और इनमें वर्षों तक अमेरिकी राजनीति को प्रभावित करने के लिए चीन के कथित प्रयासों का भी विवरण है.
ट्रंप ने कहा, “पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने चुनावी डेटा में इतिहास की सबसे बड़ी सेंध लगाई, जिसके परिणामस्वरूप चीन ने अवैध रूप से 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की फाइलें हासिल कर लीं.”
उन्होंने दावा किया कि इन रिकॉर्ड्स के अनुसार, चुराए गए डेटा में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, Political दल की प्राथमिकता और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां शामिल थीं, जिनका इस्तेमाल मतदाता पंजीकरण कराने और अन्य कथित अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता था.
ट्रंप ने आरोप लगाया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों को पहली बार 2020 में पता चला कि 18 राज्यों में करोड़ों वोटर रिकॉर्ड चीन ने खरीदे, चुराए या हैक किए थे, हालांकि President ने यह आरोप भी लगाया कि एजेंसी ने ये जानकारी प्रेसिडेंट या कांग्रेस को नहीं दी.
उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझे या President के तौर पर किसी और को यह नहीं बताया और हमारी जानकारी के मुताबिक उन्होंने कांग्रेस को भी नहीं बताया.”
–
Skip to content