
तिरुवनंतपुरम, 4 जुलाई . केरल में सत्तारूढ़ कांग्रेस एक बार फिर आंतरिक गुटबाजी के दौर से गुजरती नजर आ रही है. Chief Minister वी.डी. सतीशन की कार्यशैली और Government पर बढ़ते प्रभाव को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है, जिससे यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) Government के शुरुआती कार्यकाल पर ही Political दबाव बढ़ गया है.
ताजा विवाद इस आरोप को लेकर है कि राज्य Government कई महत्वपूर्ण नीतिगत और प्रशासनिक फैसले पार्टी संगठन से पर्याप्त परामर्श किए बिना ले रही है.
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल के समर्थक नेताओं ने राज्य Government की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) नेतृत्व की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है. उनका कहना है कि हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र के दौरान कई ऐसे मुद्दे सामने आए, जिन पर पार्टी स्तर पर चर्चा जरूरी है.
केरल कांग्रेस में गुटीय संघर्ष कोई नई बात नहीं है. समय के साथ नेतृत्व बदलता रहा है, लेकिन आंतरिक खींचतान लगातार बनी रही है. वर्तमान में पार्टी के दो प्रमुख शक्ति केंद्र Chief Minister वी.डी. सतीशन और के.सी. वेणुगोपाल माने जाते हैं, जबकि वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला का भी एक स्वतंत्र समर्थन आधार मौजूद है.
Political विश्लेषकों का मानना है कि Chief Minister पद की दौड़ में वेणुगोपाल पर बढ़त हासिल करने के बाद सतीशन की स्थिति और मजबूत हुई है. विधानसभा में उनके प्रभावी प्रदर्शन और प्रशासनिक अनुभव सीमित होने के बावजूद Government के संचालन में दिखाई गई आत्मविश्वासपूर्ण भूमिका ने उनकी Political साख को और बढ़ाया है.
हालांकि, सतीशन की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव ने वेणुगोपाल खेमे की चिंता बढ़ा दी है. इस गुट को आशंका है कि यदि समय रहते संतुलन नहीं बनाया गया तो सतीशन राज्य Government और कांग्रेस संगठन दोनों में निर्विवाद शक्ति केंद्र बन सकते हैं.
वेणुगोपाल समर्थक नेताओं की शिकायतों में राज्य निर्वाचन आयुक्त और देवस्वम प्लीडर की नियुक्तियां शामिल हैं. इसके अलावा वित्त विधेयक में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों को अनुमति देने संबंधी प्रावधान को लेकर भी नाराजगी जताई गई है. आरोप है कि इन मुद्दों पर पार्टी मंचों को विश्वास में नहीं लिया गया.
दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा में विपक्ष ने जिन फैसलों को लेकर Government को घेरा, कांग्रेस के कई नेताओं का दावा है कि उन्हें भी इन निर्णयों की पूर्व जानकारी नहीं थी.
विवाद का एक संगठनात्मक पहलू भी है. केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद कांग्रेस के पास फिलहाल पूर्णकालिक प्रदेश अध्यक्ष नहीं है. ऐसे में अगले केपीसीसी अध्यक्ष की नियुक्ति और राज्य के विभिन्न निगमों व बोर्डों में होने वाली नियुक्तियों को लेकर भी खेमेबाजी तेज हो गई है.
सूत्रों के अनुसार, वेणुगोपाल गुट इन नियुक्तियों को सतीशन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के अवसर के रूप में देख रहा है.
वहीं, Chief Minister सतीशन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह Government के दैनिक कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेंगे. उनके इस रुख से दोनों गुटों के बीच तनाव और बढ़ गया है. ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली केपीसीसी नेतृत्व की बैठक काफी अहम और संभावित रूप से विवादपूर्ण मानी जा रही है.
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डीएससी
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