
निकोसिया, 28 मई . India के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने Thursday को साइप्रस के President निकोस क्रिस्टोडौलिडेस से मुलाकात की. मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बदलते हालात और भूमध्य सागर में India के हितों पर चर्चा की.
मीटिंग के बाद विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “आज साइप्रस रिपब्लिक के President निकोस क्रिस्टोडौलिडेस से मिलकर खुशी हुई. President द्रौपदी मुर्मु और Prime Minister Narendra Modi की तरफ से शुभकामनाएं दीं.”
उन्होंने आगे कहा, “हाल के राजकीय दौरे के अच्छे नतीजे मिले, जिससे हमारी साझेदारी अगले फेज में पहुंच गई. President को मजबूत फॉलो-अप का भरोसा दिया. पश्चिम एशिया/मिडिल ईस्ट में बदलते हालात और मेडिटेरेनियन में इंडिया के इंटरेस्ट पर भी बात हुई.”
विदेश मंत्री एस. जयशंकर अभी साइप्रस के आधिकारिक दौरे पर हैं, जहां उन्होंने यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक मीटिंग में हिस्सा लिया और नीदरलैंड, पोलैंड, फ्रांस, यूक्रेन, एस्टोनिया और सऊदी अरब समेत अलग-अलग देशों के अपने समकक्षों से मिले.
बता दें कि क्रिस्टोडौलिडेस 20-23 मई तक India दौरे पर थे, जिससे दोनों देशों के संबंधों को काफी बढ़ावा मिला. New Delhi के हैदराबाद हाउस में उनकी मीटिंग के बाद, पीएम Narendra Modi ने ऐलान किया था कि दोनों देश अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने पर राजी हो गए हैं.
क्रिस्टोडौलिडेस से मिलने के बाद पीएम मोदी ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “दिल्ली में President निकोस क्रिस्टोडौलिडेस से मिलकर खुशी हुई. हमने भारत-साइप्रस की दोस्ती को और मजबूत करने पर काफी बातचीत की. हमारे देशों के बीच करीबी संबंधों को देखते हुए, हमने अपनी दोस्ती को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने का फैसला किया है.”
उन्होंने आगे कहा, “हमारी साझेदारी सच में एक मजबूत और भविष्योन्मुखी साझेदारी है, जो साझा मूल्यों पर आधारित है. हमारे देशों के बीच बढ़ते निवेश जुड़ाव बहुत ही खुशी की बात है और हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में व्यापार और आर्थिक संबंध और बढ़ेंगे.”
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत से कई खास नतीजे सामने आए, जिनमें काउंटर-टेररिज्म पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप (जेडब्ल्यूजी) बनाने पर समझौता, सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस और साइप्रस की डिप्लोमैटिक एकेडमी के बीच सहयोग, साथ ही उच्च शिक्षा और रिसर्च में सहयोग शामिल हैं.
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एबीएम
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