दिल्ली के ओखला में एक्सपायर खाद्य पदार्थों का खुलासा, नकली लेबल लगाकर हो रही थी बिक्री

New Delhi, 2 जुलाई . राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने Thursday को खाद्य और पेय पदार्थों पर फर्जी लेबल लगाने वाले गिरोह की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है.

उन्होंने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “बॉर्नविटा और मैगी जैसे उत्पादों पर फर्जी लेबल लगाकर बेचना India के बच्चों पर हमला है.”

उन्होंने बताया, “दिल्ली के ओखला में शिकायत मिलने के बाद छापेमारी की गई. यहां एक गिरोह पकड़ा गया, जो खुद ही नकली एक्सपायरी डेट और पोषण संबंधी जानकारी (न्यूट्रिशन वैल्यू चार्ट) छापकर उत्पादों पर फर्जी लेबल लगा रहा था और फिर उन्हें बेच रहा था. कार्रवाई अभी जारी है, बाकी जानकारी बाद में दी जाएगी.”

प्रियंक कानूनगो ‘पिंजरा : द केज’ नामक पुस्तक के लेखक भी हैं. पुस्तक में बाल संरक्षण संस्थानों में रहने वाले बच्चों के जीवन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई है.

इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग ने ओखला औद्योगिक क्षेत्र में एक परिसर पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में एक्सपायर हो चुके खाद्य पदार्थ बरामद किए थे. छापेमारी के दौरान Police की टीम भी मौके पर मौजूद थी. मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है.

प्रियंक कानूनगो ने अपने social media पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया. वीडियो में वह उस गोदाम का निरीक्षण करते दिखाई दे रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में सॉफ्ट ड्रिंक के कैन और खाद्य पाउडर के डिब्बे रखे हुए थे.

वीडियो में वह उन डिब्बों की जांच करते नजर आते हैं, जिन पर असली लेबल के ऊपर नकली लेबल चिपकाए गए थे. इन फर्जी लेबलों पर गलत एक्सपायरी डेट और पोषण संबंधी जानकारी लिखी थी.

उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली और उस व्यक्ति का नाम भी पूछा, जो कथित तौर पर राजधानी के बीचों-बीच इस फर्जी कारोबार को चला रहा था.

इससे पहले भी कई रिपोर्टों में सामने आया है कि कुछ लोग विदेशी ब्रांडों के खाद्य उत्पादों को अवैध तरीके से आयात कर, उनकी नई पैकिंग करके और फर्जी लेबल लगाकर बेचते हैं. कई बार ये लोग बेहद कम कीमत पर एक्सपायर हो चुके उत्पाद खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें बड़े किराना स्टोर, नामी दुकानों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंचा देते हैं.

हालांकि, ऐसे मामलों में पहले भी छापेमारी, गिरफ्तारियां और कानूनी कार्रवाई हुई है, लेकिन इसके बावजूद ओखला जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं.

एएमटी/एबीएम