
वॉशिंगटन, 5 जून . मानवाधिकारों के कथित गंभीर उल्लंघनों के बावजूद Pakistan को व्यापारिक रियायतें जारी रखने को लेकर यूरोपीय संघ (ईयू) की आलोचना तेज हो गई है. विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि 2014 से लागू विशेष व्यापारिक व्यवस्था के बावजूद Pakistan अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों पर अपेक्षित प्रगति करने में विफल रहा है.
ब्रुसेल्स स्थित मानवाधिकार संगठन सीमाओं के बिना मानवाधिकार (एचआरडब्ल्यूएफ) ने Pakistan को दिए गए जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस (जीएसपी-प्लस) दर्जे को “ईयू और Pakistan के बीच खराब सौदा” बताया है. संगठन का कहना है कि जब तक मानवाधिकारों के क्षेत्र में ठोस सुधार नहीं दिखता, तब तक इस सुविधा को निलंबित किया जाना चाहिए.
तुर्की मूल की पत्रकार उज़े बुलुत ने अमेरिकी मीडिया मंच पीजे मीडिया में प्रकाशित लेख में लिखा है कि 2014 में समझौता लागू होने के बाद से Pakistan अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों को लागू करने में सार्थक प्रगति दिखाने में नाकाम रहा है. इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव देश के ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय पर पड़ा है.
लेख के अनुसार, Pakistan की आबादी में ईसाइयों की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से भी कम है, लेकिन उन्हें सामाजिक और संस्थागत स्तर पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. भीड़ हिंसा, ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग, आर्थिक भेदभाव, अपहरण, यौन हिंसा और जबरन धर्मांतरण जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं.
बुलुत ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद ईयू Pakistan को बड़ी आर्थिक राहत प्रदान करता रहा है. Pakistan को जीएसपी-प्लस योजना के तहत यूरोपीय बाजार में 66 प्रतिशत से अधिक टैरिफ श्रेणियों पर शुल्क-मुक्त या रियायती पहुंच प्राप्त है.
धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति का उल्लेख करते हुए लेख में लाहौर की 14 वर्षीय ईसाई किशोरी निशा बीबी के मामले का भी जिक्र किया गया है. परिवार और कानूनी प्रतिनिधियों के अनुसार, उसका कथित रूप से अपहरण कर जबरन इस्लाम धर्म स्वीकार कराया गया और विवाह कराया गया. पीड़िता के पिता अब्बास मसीह ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी एक मुस्लिम परिवार में घरेलू सहायक के रूप में काम करते समय लापता हो गई थी.
लेख में कहा गया है कि Pakistan में कानूनी, धार्मिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां लैंगिक असमानता को बढ़ावा देती हैं, जिसके कारण ईसाई लड़कियां अपहरण, जबरन धर्मांतरण और जबरन विवाह जैसी घटनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील रहती हैं.
बुलुत ने यह भी कहा कि मानवाधिकार, श्रमिक अधिकारों और सुशासन के क्षेत्रों में सुधार के वादों के बावजूद Pakistan अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाया है, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा के मामले में.
हालांकि, Pakistan अब भी जीएसपी-प्लस योजना के तहत मिलने वाले व्यापारिक लाभों का बड़ा लाभार्थी बना हुआ है, जिसे लेकर यूरोपीय संघ की नीतियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.
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डीएससी
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