
New Delhi, 26 मई . सीबीएसई बोर्ड परीक्षा परिणाम के बाद लाखों छात्रों ने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया है. हालांकि, इस दौरान छात्रों को तकनीकी दिक्कतों और खासतौर पर पेमेंट फेल होने की शिकायतों का सामना करना पड़ा है. इस समस्या को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने Tuesday को चार प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की.
यह बैठक सीबीएसई की भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तेज और छात्र हितैषी बनाने के उद्देश्य की गई थी. इस बैठक में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और इंडियन बैंक के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. बैठक का मुख्य उद्देश्य सीबीएसई की पेमेंट गेटवे प्रणाली में व्यापक सुधार करना था, ताकि छात्रों को परीक्षा परिणामों के बाद विभिन्न सेवाओं के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े.
बता दें कि सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन व पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर कई छात्र, शिक्षक व अभिभावक अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं. इस विषय पर देशभर में कई विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के बीच व्यापक असंतोष और चर्चा का माहौल है. दरअसल, इस वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली के जरिए किया गया है.
कई छात्रों का कहना है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही से नहीं हो पाया, जिसके कारण वे पुनर्मूल्यांकन व डिजिटली स्कैन की गई कॉपी के लिए आवेदन कर रहे हैं. वहीं, कई छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर प्रश्न उठाए हैं. कई छात्रों का कहना है कि डिजिटली स्कैन व शेयर की गई कॉपी उनकी है ही नहीं. परीक्षा परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र रिजल्ट के प्रति असंतोष व्यक्त किया.
छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्मूल्यांकन के लिए भी आवेदन किया है. हालांकि, कई बार छात्रों को पुनर्मूल्यांकन के लिए फीस जमा करवाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. छात्रों की शिकायत है कि पुनर्मूल्यांकन की ऑनलाइन पेमेंट बार बार फेल हो रही है.
शिक्षा मंत्री ने Tuesday को बैंक अधिकारियों संग हुई बैठक में कहा कि सीबीएसई की पोस्ट-एग्जाम सेवाओं, जैसे उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी प्राप्त करना, पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना तथा अन्य शुल्क आधारित प्रक्रियाओं के लिए एक मजबूत, भरोसेमंद और सुचारु डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित करना अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने बैंकों को निर्देश दिया कि वे सीबीएसई के साथ मिलकर ऐसी भुगतान व्यवस्था तैयार करें जिसमें लेनदेन समय पर और सुरक्षित तरीके से हो सके. किसी भी भुगतान संबंधी समस्या का तत्काल समाधान उपलब्ध कराया जा सके.
धर्मेंद्र प्रधान ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि यदि किसी छात्र का भुगतान विफल हो जाता है या अतिरिक्त राशि कट जाती है, तो उसका स्वत: और शीघ्र रिफंड सुनिश्चित किया जाए. इसके साथ ही उन्होंने पेमेंट गेटवे प्रणाली में उन्नत तकनीकी सुरक्षा उपाय, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और तेज शिकायत निवारण तंत्र लागू करने के निर्देश भी दिए. उनका कहना था कि छात्रों को तकनीकी गड़बड़ियों या भुगतान विफलताओं के कारण अनावश्यक तनाव और परेशानी नहीं झेलनी चाहिए.
बैठक में शामिल सभी बैंकों ने शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया. बैंकों ने कहा कि वे सीबीएसई के साथ समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द तकनीकी उन्नयन और नई सुरक्षा व्यवस्थाओं को लागू करेंगे, जिससे डिजिटल भुगतान प्रक्रिया अधिक सुगम और विश्वसनीय बन सके.
गौरतलब है कि इससे पहले 24 मई 2026 को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ भी इस विषय पर चर्चा की थी. यह चर्चा सीबीएसई के पोस्ट-रिजल्ट और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रियाओं के दौरान छात्रों को हुई भुगतान और तकनीकी समस्याओं के मद्देनजर की गई थी.
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जीसीबी/डीकेपी
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