
New Delhi, 30 जुलाई . Enforcement Directorate (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 25 मई को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया. इसके तहत अमीरा प्योर फूड्स लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बैंक ऑफ सिंगापुर में मौजूद विदेशी बैंक खातों में जमा यूएस डॉलर 10,034,819.01 (लगभग 94.76 करोड़ रुपए) की राशि को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है.
ईडी ने Thursday को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि अस्थायी रूप से जब्त किए गए बैंक बैलेंस मुख्य आरोपी करण चनाना, अमीरा फूड्स प्राइवेट लिमिटेड और अनंत्या प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर थे. यह अटैचमेंट यूनाइटेड किंगडम और सिंगापुर के साथ म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (एमएलएटी) मैकेनिज्म और अन्य उपलब्ध तरीकों से संबंधित पक्षों को सूचित किया गया है.
ईडी ने इस मामले की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (बीएस एंड एफबी), New Delhi द्वारा आपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज First Information Report के आधार पर शुरू की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी कंपनी अमीरा प्योर फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने अपने डायरेक्टरों/प्रमोटरों/कर्मचारियों और अन्य लोगों के माध्यम से फंड को इधर-उधर करके और गलत तरीके से इस्तेमाल करके धोखाधड़ी की है.
साथ ही आपराधिक गबन, आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी आदि के जरिए केनरा बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम को लगभग 1201.85 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है. ईडी ने जानकारी दी कि अमीरा फूड्स ग्रुप ब्रांडेड पैक्ड फूड, खासकर भारतीय बासमती चावल के निर्माण और बिक्री के कारोबार में था.
ईडी की जांच से पता चला कि अमीरा फूड्स ग्रुप ने केनरा बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम से लगभग 1201.85 करोड़ रुपए का भारी बैंक लोन/कैश क्रेडिट लोन लिया था, जो बाद में 2017 में एनपीए बन गया. जांच में यह भी पता चला कि अमीरा प्योर फूड्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों/शेयरधारकों/डायरेक्टरों ने मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध किया है और इसी के अनुसार इस मामले में 21 व्यक्तियों/कंपनियों/संस्थाओं के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) दायर की गई है.
इससे पहले जांच के दौरान ईडी ने अपराध से प्राप्त आय वाली संपत्तियों की पहचान की थी और 13 मार्च 2024 को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी करके संपत्तियों को अटैच किया था. इसके अलावा, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (एफईओए) के तहत की गई जांच से यह भी पता चला कि करण चनाना और अनीता डिंग India छोड़कर यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे थे और कानून की उचित प्रक्रिया का सामना करने के लिए जानबूझकर India नहीं लौटे. इसी कारण दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्लू) जारी किए गए.
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डीके/एबीएम
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