
कोलकाता, 19 मई . Enforcement Directorate (ईडी) ने सिंडिकेट और भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ के खिलाफ अदालत में कई गंभीर आरोप लगाए हैं. एजेंसी ने अदालत से उसकी 10 दिन की हिरासत की मांग की है.
ईडी ने दावा किया कि सोना पप्पू लोगों को धमकाकर उनकी जमीन और संपत्तियां कम कीमत पर खरीदता था. एजेंसी ने अदालत में कहा कि वह अकेले नहीं, बल्कि तीन लोगों के एक गिरोह के साथ मिलकर यह काम करता था.
जांच एजेंसी के मुताबिक, पप्पू बेहाला के कारोबारी जॉय कामदार और कोलकाता Police के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के लिए काम करता था तथा भूमि सिंडिकेट की अहम जिम्मेदारियां संभालता था.
Monday रात करीब नौ घंटे की लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने सोना पप्पू को गिरफ्तार किया था. Tuesday को उसे अदालत में पेश किया गया.
ईडी के वकील ने अदालत को बताया कि पप्पू ने लंबे समय से एक संगठित भूमि सिंडिकेट तैयार कर रखा था. एजेंसी ने उस पर रंगदारी, धमकी, जमीन कब्जाने और अवैध हथियार रखने जैसे कई आरोप लगाए हैं.
ईडी ने अदालत को बताया कि पप्पू के घर पर छापेमारी के दौरान एक रिवॉल्वर बरामद किया गया, जिसे कारोबारी जॉय कमदार के संगठन के नाम पर खरीदा गया था.
एजेंसी के मुताबिक, फरवरी में रवींद्र सरोवर थाने के अंतर्गत कंकुलिया इलाके में हुए उपद्रव के बाद पप्पू का नाम सामने आया था. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि दो गुटों के बीच हुई हिंसा और तोड़फोड़ के पीछे पप्पू और उसके सहयोगियों का हाथ था.
हालांकि पप्पू के वकील ने अदालत में कहा कि हथियार अधिकृत डीलर से सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए खरीदा गया था.
ईडी ने दावा किया कि यह गिरोह बुजुर्ग जमीन मालिकों को निशाना बनाकर उनकी संपत्तियां बेहद कम कीमत पर खरीदता था और निर्माण कार्यों में “आपराधिक ताकत” का इस्तेमाल करता था.
एजेंसी ने अदालत में उदाहरण देते हुए कहा कि 2024 में 7.7 करोड़ रुपये मूल्य की एक जमीन कथित तौर पर सिर्फ 1 करोड़ रुपये में खरीदी गई. वहीं 2022 में 5.42 करोड़ रुपये मूल्य वाली 18 कट्ठा जमीन 1.39 करोड़ रुपये में खरीदी गई.
पप्पू के वकील ने सवाल उठाया कि यदि जमीन कम कीमत पर खरीदी गई थी, तो जमीन मालिकों ने शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई.
ईडी ने यह भी दावा किया कि पप्पू स्थानीय कारोबारियों को विभिन्न निर्माण और रियल एस्टेट कंपनियों के जरिए नियंत्रित करता था. जांच में पप्पू और उसके परिवार के नाम पर करीब 30 कंपनियों का पता चला है.
एजेंसी ने पप्पू पर जांच में सहयोग न करने का भी आरोप लगाया. ईडी के अनुसार उसे तीन बार समन भेजा गया, लेकिन वह किसी सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ और अचानक Monday को पेश हुआ.
ईडी ने अदालत को बताया कि बैंक खातों की जांच में कमदार और पप्पू से जुड़ी कंपनियों के बीच करोड़ों रुपये के लेनदेन का पता चला है. एजेंसी का दावा है कि पप्पू, कमदार या उसकी कंपनियों की योजनाओं को लागू करता था.
वहीं पप्पू के वकील ने ईडी की मांग का विरोध करते हुए कहा कि व्यापार करना कोई अपराध नहीं है. उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि कारोबार से कमाया गया पैसा भ्रष्टाचार से जुड़ा है या नहीं. वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल ने जांच के दायरे में आने वाले आरोपों से कोई अवैध कमाई नहीं की है और उनकी छवि खराब करने के लिए यह आरोप लगाए जा रहे हैं.
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डीएससी
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