‘नेक्सा एवरग्रीन’ धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने सुभाष बिजनोरिया को किया गिरफ्तार

jaipur, 11 अगस्त . Enforcement Directorate (ईडी) के jaipur जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत Monday को सुभाष चंद्र बिजनोरिया (उर्फ सुभाष चंद्र बिजारणिया) को गिरफ्तार किया है.

ईडी ने Tuesday को एक प्रेस विज्ञप्ति कर जानकारी दी कि यह गिरफ्तारी ‘नेक्सा एवरग्रीन’ धोखाधड़ी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई है. इस धोखाधड़ी में रणवीर बिजारणिया और सुभाष चंद्र बिजनोरिया ने अपने साथियों के साथ मिलकर बड़ी संख्या में निवेशकों से 2,676 करोड़ रुपए जमा किए थे.

सुभाष चंद्र बिजनोरिया को jaipur की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) के सामने पेश किया गया, जिसने उन्हें चार दिन यानी 13 अगस्त तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया. ईडी ने Rajasthan Police द्वारा नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के खिलाफ बड़े पैमाने पर निवेश धोखाधड़ी के मामले में दर्ज कई First Information Report और चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की थी.

जांच से पता चला कि मुख्य आरोपी रणवीर बिजारणिया और सुभाष चंद्र बिजनोरिया (उर्फ सुभाष चंद्र बिजारणिया) ने अपने साथियों के साथ मिलकर निवेशकों को यह झूठा दावा करके लुभाया कि उनके पैसे को Gujarat के धोलेरा स्मार्ट सिटी में जमीन के विकास और प्लॉटिंग प्रोजेक्ट्स में लगाया जाएगा.

निवेशकों को 60 हफ्तों तक हर हफ्ते 3 प्रतिशत का पक्का रिटर्न या प्लॉट देने का वादा करके निवेश के लिए मनाया गया. इसके साथ ही मल्टी-लेवल रेफरल स्कीम के तहत नए निवेशकों को जोड़ने पर अतिरिक्त कमीशन और इनाम (जैसे लैपटॉप, मोटरसाइकिल और कार) देने का लालच भी दिया गया.

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि सुभाष चंद्र बिजनोरिया नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के मुख्य कर्ता-धर्ताओं और संचालकों में से एक थे और रणवीर बिजारणिया के साथ मिलकर इस पूरी धोखाधड़ी वाली गतिविधि को पूरी तरह से कंट्रोल करते थे. उन्होंने अपराध से हुई कमाई को इधर-उधर घुमाने और छिपाने के लिए अपने साथियों और निवेशकों के नाम पर कंपनियों, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्मों और प्रोप्राइटरशिप फर्मों का एक जाल बनाया और चलाया.

इन संस्थाओं और उनके बैंक खातों का इस्तेमाल व्यवस्थित तरीके से निवेशकों का पैसा इकट्ठा करने, खातों के बीच पैसे ट्रांसफर करने, पोंजी स्कीम की तरह पुराने निवेशकों को रिटर्न देने और अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया, जिससे पैसे के असली स्रोत और मालिकाना हक को छिपाया जा सके.

जांच में यह भी पता चला कि सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, निवेशक प्रबंधन, बैंकिंग कामकाज, संस्थाओं को रजिस्टर करना और पैसे का गलत इस्तेमाल, ये सभी काम उनके निर्देशों पर किए गए थे. इससे पहले इस निदेशालय ने जून 2025 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत jaipur, सीकर, झुंझुनू और Ahmedabad में 25 जगहों पर तलाशी ली थी, जिसमें 2.04 करोड़ रुपए नकद के साथ-साथ कई आपत्तिजनक रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए थे.

इसके अलावा, नेक्सा ग्रुप की विभिन्न संस्थाओं/सहयोगियों से जुड़े बैंक खातों/क्रिप्टो खातों में मौजूद लगभग 15 करोड़ रुपए की राशि को भी फ्रीज कर दिया गया था. वहीं, ईडी की ओर से इस मामले की जांच और आगे की कार्रवाई जारी है.

डीके/पीएम