मुंबई: ऑनलाइन सट्टेबाजी और धोखाधड़ी मामले में ईडी की कार्रवाई, कई शहरों में छापेमारी

Mumbai , 25 जुलाई . Enforcement Directorate (ईडी) के Mumbai क्षेत्रीय कार्यालय ने ऑनलाइन सट्टेबाजी/गेमिंग और निवेश धोखाधड़ी गिरोह की जांच के सिलसिले में बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने Mumbai , पुणे और Bengaluru स्थित विभिन्न परिसरों में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान चलाया है.

यह जांच ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म ‘ऑल पैनल एक्सचेंज’ से जुड़े एक मामले से संबंधित है, जिसके माध्यम से एक शिकायतकर्ता को व्हाट्सएप संदेश के जरिए गेमिंग/सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर लुभाया गया और जलगांव Police ने First Information Report दर्ज की. लॉगिन क्रेडेंशियल दिए जाने के बाद शिकायतकर्ता को विश्वास जीतने के लिए शुरुआती निकासी की अनुमति दी गई और उसके बाद उसे बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया. बाद के निकासी अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया गया और ऑपरेटरों ने कोई जवाब नहीं दिया.

पीएमएलए के तहत की गई जांच में पता चला कि गेमिंग/बेटिंग प्लेटफॉर्म के पीड़ितों से एकत्र की गई धनराशि पुणे स्थित कंपनी एडसोम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी, जहां विभिन्न फर्जी खातों और बिचौलियों के माध्यम से करोड़ों रुपए जमा किए गए थे. एडसोम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड और उससे संबंधित कंपनियों के खाते देश भर में पीड़ितों द्वारा दर्ज की गई कई साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े पाए गए, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग धोखाधड़ी, निवेश धोखाधड़ी, शेयर ट्रेडिंग धोखाधड़ी, क्रिप्टो धोखाधड़ी और ऑनलाइन टास्क-आधारित धोखाधड़ी शामिल हैं. जांच के दौरान यह भी पता चला कि Bengaluru Police ने एडसोम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ ऑनलाइन गेमिंग धोखाधड़ी के मामले में एक First Information Report दर्ज की थी, जिसमें शिकायतकर्ता से 5.30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई थी.

जांच से पता चला कि अपराध से प्राप्त धन का एक हिस्सा व्यवस्थित रूप से फर्जी संस्थाओं के जाल के माध्यम से छिपाया गया, क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के जरिए आभासी डिजिटल संपत्तियों में परिवर्तित किया गया और अंततः विदेशी संस्थाओं/व्यक्तियों को हस्तांतरित किया गया. इसके अलावा, यह पाया गया कि अपराध से प्राप्त धन को छिपाने के लिए इस्तेमाल की गई विभिन्न संस्थाएं फर्जी संस्थाएं थीं जिनका कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था और जिन्हें फर्जी निदेशकों द्वारा स्थापित किया गया था, जिनका प्रबंधन और नियंत्रण अंततः अन्य व्यक्तियों द्वारा किया जाता था. इनमें से कुछ तो अपने पंजीकृत व्यावसायिक स्थानों पर मौजूद भी नहीं थीं.

यह भी पता चला है कि एक क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के केवाईसी और जाली दस्तावेजों का उपयोग करके एक व्यक्ति ने क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर खाता/वॉलेट खोला, जिसने उक्त कोऑपरेटिव सोसाइटी के बैंक खाते के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रुपए की राशि का लेन-देन किया और इस राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर अवैध गेमिंग/सट्टेबाजी प्लेटफार्मों से भोले-भाले पीड़ितों को लुभाकर धोखाधड़ी के माध्यम से अर्जित अपराध की आय से जुड़ा हुआ पाया गया.

तलाशी अभियान के दौरान, कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य भौतिक साक्ष्य बरामद कर जब्त किए गए. इसके अलावा, कई संस्थाओं/व्यक्तियों से जुड़े विभिन्न बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है. आगे की जांच जारी है.

एमएस/