
इरोड, 2 जुलाई . जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) ने कलिंगरायन और लोअर भवानी प्रोजेक्ट (एलबीपी) नहर प्रणालियों से सिंचाई के लिए तुरंत पानी छोड़ने से इनकार कर दिया है. विभाग ने इसके लिए लोअर भवानी डैम में जलस्तर बहुत कम होने और जलग्रहण क्षेत्रों से पर्याप्त पानी नहीं आने का हवाला दिया है.
विभाग ने कहा कि जलाशय में पानी की आवक स्थिर होने के बाद ही सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा, क्योंकि वर्तमान में उपलब्ध जल भंडार को पेयजल जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है.
हालांकि, इस फैसले ने दोनों सिंचाई प्रणालियों पर निर्भर किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. किसान संगठन डैम में उपलब्ध सीमित पानी के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग मांगें कर रहे हैं.
कलिंगरायन नहर प्रणाली के तहत आने वाले किसानों के एक संघटन ने घोषणा की है कि अगर 5 जुलाई तक सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया, तो वे 6 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे. किसानों का कहना है कि लंबे समय से पानी की सप्लाई बंद होने से केले और गन्ने जैसी खड़ी फसलों पर बुरा असर पड़ा है और हल्दी व प्याज की खेती की तैयारियों में भी रुकावट आई है.
कालिंगरायन नहर में आमतौर पर जून के मध्य से लोअर भवानी डैम से पानी आता है और यह आपूर्ति अप्रैल के आखिर तक जारी रहती है. हालांकि, इस साल मार्च में नहर के नवीनीकरण कार्यों के लिए पानी की आपूर्ति रोक दी गई थी.
अधिकारियों ने पहले रखरखाव कार्य पूरा होने के बाद जून के अंत तक पानी छोड़ने की योजना बनाई थी, लेकिन जल संकट गहराने के कारण इस योजना को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है.
फिलहाल, डैम की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. 32.8 हजार मिलियन क्यूबिक फीट के क्षमता वाले लोअर भवानी डैम में Tuesday तक सिर्फ 5.34 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी था, जबकि जलग्रहण क्षेत्र में कम बारिश के कारण पानी का बहाव सिर्फ 81 क्यूसेक था.
इस बीच, लोअर भवानी प्रोजेक्ट नहर प्रणाली के तहत आने वाले किसानों ने कलिंगरायन नहर से पानी छोड़ने के किसी भी कदम का विरोध किया है. उनका तर्क है कि कावेरी के पानी के मौजूदा आवंटन और Government के पिछले आदेशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा हालात में पानी का रुख बदला गया, तो वे विरोध-प्रदर्शन करेंगे, जिसमें सड़कें जाम करना भी शामिल है.
डब्ल्यूआरडी अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा जल भंडार सिर्फ पीने के पानी की जरूरतों के लिए पर्याप्त है और सिंचाई के लिए पानी छोड़ने पर तब तक विचार नहीं किया जा सकता, जब तक कि पानी की आवक में काफी बढ़ोतरी न हो.
विभाग के अनुसार, कलिंगरायन या लोअर भवानी प्रोजेक्ट नहर प्रणालियों के लिए पानी छोड़े जाने से पहले लगभग 5,000 से 6,000 क्यूसेक पानी का लगातार बहाव जरूरी होगा. अधिकारियों ने बताया कि कलिंगरायन नहर के मरम्मत का काम लगभग पूरा हो चुका है, जिससे जलाशय की स्थिति बेहतर होते ही तुरंत पानी छोड़ा जा सकेगा.
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डीसीएच/
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