बिजली बाजार में सुधार के द्वार खुले

नई दिल्ली (New Delhi) . बिजली क्षेत्र पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से बिजली बाजार में उन बड़े सुधारों की प्रतीक्षा कर रहा है, जो भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) और केन्द्रीय विद्युत विनियामक (सीईआरसी) के बीच अधिकार क्षेत्र के मुद्दों के कारण रुका हुआ था. कल को महालय के दिन, भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) और केन्द्रीय विद्युत विनियामक (सीईआरसी) के बीच विद्युत व्युत्पन्नों (डेरिवेटिव्स) के नियामक क्षेत्राधिकार के संबंध में लंबे समय से लंबित मामले में उच्चतम न्यायालय के साथ सेबी और सीईआरसी द्वारा किए गए समझौते के अनुसार इस मामले का अंततः निपटारा कर दिया है. विद्युत मंत्रालय ने अतिरिक्त सचिव, विद्युत मंत्रालय की अध्यक्षता में 26 अक्टूबर, 2018 को एक समिति का गठन करके बिजली के विभिन्न प्रकार के अनुबंधों के संबंध में भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) और केन्द्रीय विद्युत विनियामक (सीईआरसी) के बीच क्षेत्राधिकार के मुद्दे को हल करने की पहल की. विद्युत डेरिवेटिव्स के लिए तकनीकी, परिचालन और कानूनी ढांचे की जांच करने और इस संबंध में सिफारिश देने के लिए इस समिति के अन्य सदस्यों में आर्थिक मामलों के विभाग (वित्त मंत्रालय), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी), पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीओएसओसीओ), भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी), इंडियन एनर्जी एक्सचेंज, पावर एक्सचेंज के प्रतिनिधि शामिल थे.

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