
Mumbai , 10 अगस्त . भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) का प्रभाव लगातार मजबूत होता जा रहा है. घरेलू निवेशकों ने कैलेंडर वर्ष 2026 में 7 अगस्त तक 5.13 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध इक्विटी निवेश किया है. इसके साथ ही यह लगातार तीसरा वर्ष बन गया है जब घरेलू संस्थागत निवेशकों का निवेश 5 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया है. यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब विदेशी पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव बना हुआ है.
स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू संस्थागत निवेशकों में बैंक, घरेलू वित्तीय संस्थान (डीएफआई), बीमा कंपनियां, पेंशन फंड और म्यूचुअल फंड शामिल हैं. पिछले वर्ष यानी कैलेंडर वर्ष 2025 की समान अवधि में डीआईआई ने 4.48 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया था. इस बार यह आंकड़ा उससे काफी अधिक रहा है.
पूरा वर्ष 2025 देखें तो घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 7.88 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया था. वहीं वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 5.26 लाख करोड़ रुपए रहा था. लगातार बढ़ते निवेश से स्पष्ट है कि भारतीय निवेशकों का घरेलू पूंजी बाजार पर भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है.
पिछले 36 महीनों यानी अगस्त 2023 से अब तक डीआईआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में कुल 19.21 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है. इसके विपरीत इसी अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने लगभग 10 लाख करोड़ रुपए के भारतीय शेयर बेचे हैं. ऐसे में घरेलू निवेशकों ने बाजार को स्थिरता देने और विदेशी बिकवाली के प्रभाव को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और म्यूचुअल फंडों के जरिए खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी घरेलू निवेश प्रवाह का मुख्य आधार रही है. पश्चिम एशिया में जारी भू-Political तनाव के बावजूद भारतीय बाजारों में निवेशकों का विश्वास बना हुआ है.
विश्लेषकों के अनुसार, हाल के महीनों में GST संग्रह मजबूत बना हुआ है और आर्थिक मोर्चे पर कोई बड़ी नकारात्मक स्थिति सामने नहीं आई है. यही कारण है कि निवेशकों का रुझान भारतीय इक्विटी बाजार की ओर बना हुआ है.
म्यूचुअल फंड उद्योग में इक्विटी और बैलेंस्ड फंड योजनाओं में लगातार मजबूत निवेश आ रहा है. इससे फंड हाउसों के पास बाजार में निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध हो रही है और घरेलू निवेश प्रवाह को मजबूती मिल रही है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में भी डीआईआई निवेश का यह सिलसिला जारी रह सकता है.
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भू-Political जोखिमों में कमी, ऊर्जा कीमतों में नरमी, कॉरपोरेट आय में सुधार और 2024 के उच्च स्तरों की तुलना में शेयरों के मूल्यांकन में आए सुधार ने भारतीय इक्विटी बाजार को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया है.
इस बीच, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भी सकारात्मक होता नजर आ रहा है. लगातार चार महीने की बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों ने दोबारा खरीदारी शुरू की है. इससे बाजार धारणा और मजबूत हुई है तथा निवेशकों का विश्वास बढ़ा है.
सेक्टरवार निवेश की बात करें तो जून 2026 तिमाही में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने उपभोक्ता क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसयू बैंक), ऊर्जा, दूरसंचार, धातु और प्रौद्योगिकी कंपनियों में अधिक निवेश किया.
वहीं उन्होंने निजी बैंक, एनबीएफसी, कैपिटल गुड्स, केमिकल, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और ऑटोमोबाइल शेयरों में अपेक्षाकृत कम निवेश बनाए रखा.
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डीबीपी
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