डीएमके और टीवीके एक ही नाव पर सवार: तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पास होने पर भाजपा का हमला

चेन्नई, 12 अगस्त . तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने Wednesday को कहा कि परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर डीएमके और टीवीके ‘एक ही नाव पर सवार’ हैं.

उनकी यह प्रतिक्रिया तमिलनाडु विधानसभा द्वारा Chief Minister सी. जोसेफ विजय के पेश किए गए एक विशेष प्रस्ताव को पारित करने के बाद आई है. इस प्रस्ताव में केंद्र से आग्रह किया गया है कि भविष्य में होने वाले परिसीमन को लेकर चिंताओं के बीच Lok Sabha की सीटों की संख्या को स्थायी रूप से 543 पर ही रखा जाए और राज्यों के बीच संसदीय सीटों के मौजूदा बंटवारे को सुरक्षित किया जाए.

हालांकि, डीएमके ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है.

से ​​बात करते हुए तिरुपति ने कहा कि हम यही कह रहे हैं कि डीएमके और टीवीके दोनों एक ही नाव पर सवार हैं, क्योंकि डीएमके पूरी तरह से उलझन में है. पहले उन्होंने कहा था कि एक भी सीट कम नहीं होनी चाहिए. अब उन्हें भरोसा दिलाया जा रहा है कि तमिलनाडु के लिए 20 से ज्यादा सीटें होंगी.

देश के पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों के नेतृत्व का उदाहरण देते हुए भाजपा नेता ने कहा कि India की President (द्रौपदी मुर्मु) देश के पूर्वी हिस्से, Odisha से हैं. देश के उपPresident (सीपी राधाकृष्णन) दक्षिणी हिस्से, खासकर तमिलनाडु से हैं, और Prime Minister (Narendra Modi) पश्चिमी हिस्से, यानी Gujarat से हैं. इसलिए, देश के सबसे ऊंचे पद पर कोई उत्तर भारतीय नहीं है.

भाजपा विधायक भोजराजन ने कहा कि पार्टी ने Chief Minister विजय द्वारा पेश किए गए विशेष प्रस्ताव का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि अधिक जन-प्रतिनिधियों के लिए परिसीमन जरूरी है, ताकि वे समाज की बेहतर सेवा कर सकें.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिसीमन के मुद्दे को ‘उत्तर-दक्षिण टकराव’ कहना सही नहीं है.

उन्होंने से ​​कहा कि अलग-अलग संस्कृतियों और भाषाओं के बावजूद हम एक देश हैं, इसलिए हमें ऐसे बहाने नहीं बनाने चाहिए और न ही ऐसे आरोप लगाने चाहिए कि केंद्र Government उत्तर और दक्षिण (भारत) के बीच बंटवारा करेगी. यह पुरानी बात हो चुकी है.

हालांकि, डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस इलांगोवन का मानना ​​था कि परिसीमन ‘जरूरी नहीं’ है.

उन्होंने से ​​कहा कि हम परिसीमन के खिलाफ थे क्योंकि भाजपा Government कई आधारों पर सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना चाहती थी, जिसका हम पूरी तरह से विरोध करते हैं. हम चाहते थे कि परिसीमन के बाद भी मौजूदा निर्वाचन क्षेत्र बने रहें. हमने प्रस्ताव का समर्थन किया क्योंकि परिसीमन की प्रक्रिया से तमिलनाडु और दक्षिण India के अन्य राज्यों को नुकसान होगा.

इलांगोवन ने कहा कि परिसीमन ‘अनुचित’ है क्योंकि अगर इसे लागू किया जाता है, तो दक्षिण के चारों राज्यों को लगभग 170 सांसद मिलेंगे, और बाकी उत्तरी राज्यों को 680 सांसद मिलेंगे.

डीएमके नेता ने आरोप लगाया कि Government चाहे किसी की भी हो, दक्षिणी राज्यों को नजरअंदाज किया जाएगा.

एमएस/