
Bengaluru, 17 अप्रैल . कर्नाटक के डिप्टी Chief Minister डीके शिवकुमार ने Friday को कहा कि पार्टी के दो अल्पसंख्यक नेताओं के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए की गई कार्रवाई में कुछ भी निजी नहीं था, क्योंकि दिल्ली से निर्देश मिले बिना कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती.
डिप्टी सीएम शिवकुमार ने Friday को Bengaluru में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “अल्पसंख्यक नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई में कुछ भी निजी नहीं है. पार्टी के पास अपनी रिपोर्ट है. जब किसी मौजूदा एमएलए या एमएलसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाती है तो दिल्ली से निर्देश मिले बिना हमारे स्तर पर ऐसा नहीं किया जा सकता.”
उन्होंने कहा कि हमें मिले निर्देशों के आधार पर ही काम करना होता है. वे मुझ पर आरोप लगा सकते हैं, लेकिन मुझे ऐसे आरोपों की परवाह नहीं है. हमें पार्टी के अनुशासन के तहत ही काम करना होता है.
इस घटनाक्रम से अल्पसंख्यक समुदाय में कोई गलत संदेश जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी का अस्तित्व ही अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, किसानों, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने के लिए है.”
Chief Minister सिद्दारमैया से मतभेदों की खबरों पर उन्होंने कहा कि हम हर दिन आपस में बात करते हैं और मुद्दों पर चर्चा करते हैं. आप मेरे खेमे की बात करते हैं. मेरा खेमा आखिर है कहां? क्या किसी ने कोई नेमप्लेट लगा रखी है जिस पर लिखा हो कि वह सिद्दारमैया के खेमे का है? सभी 139 विधायक हैं, और वे सिद्दारमैया के विधायक भी हैं. हमारे बीच कोई खेमेबाजी नहीं है.”
उन्होंने कहा कि मीडिया हमेशा शिवकुमार और सिद्दारमैया के खेमों की बातें करता रहता है. क्या आपको सच में पता है कि कौन-सा विधायक किस गुट का है? पार्टी के भीतर कोई विरोधाभास नहीं है. सभी 139 विधायक एक ही गुट कांग्रेस गुट के हैं.
बता दें कि एक बड़े घटनाक्रम में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने Wednesday को विधान परिषद सदस्य अब्दुल जब्बार को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था.
उपChief Minister और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने निलंबन आदेश पर हस्ताक्षर किए थे.
पत्र में कहा गया था, “विधान परिषद के सदस्य अब्दुल जब्बार को, दावणगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में हुए उपचुनाव के दौरान उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों को देखते हुए तत्काल प्रभाव से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया जाता है.”
अब्दुल जब्बार राज्य पार्टी के अल्पसंख्यक विंग का नेतृत्व कर रहे थे और उन्हें पहले इस पद से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था. उनका इस्तीफा स्वीकार करने के बाद उपChief Minister शिवकुमार ने अल्पसंख्यक विंग को भंग कर दिया. अब्दुल जब्बार दावणगेरे दक्षिण विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की भी इच्छा रखते थे.
यह ध्यान दिया जा सकता है कि कांग्रेस विधान परिषद सदस्य नसीर अहमद को भी 14 अप्रैल को इसी तरह के कारणों से Chief Minister सिद्दारमैया के Political सलाहकार के पद से हटा दिया गया था.
बता दें कि मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने Thursday को उपचुनावों के दौरान कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर एमएलसी अब्दुल जब्बार और नसीर अहमद के खिलाफ की गई कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया था. पार्टी पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्होंने सत्ताधारी कांग्रेस नेतृत्व को इसके परिणामों की चेतावनी दी.
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एएसएच/डीकेपी
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