
कोलकाता, 23 जुलाई . पश्चिम बंगाल Government में मंत्री दिलीप घोष ने Thursday को तृणमूल नेता कुणाल घोष को विधानसभा से और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के संसद से निलंबन के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि टीएमसी में अनुशासन की कमी दिखाई दे रही है और पार्टी के अंदर गुटबाजी बढ़ रही है.
कुणाल घोष के विधानसभा से निलंबन पर दिलीप घोष ने कहा कि वह खुद को एक बड़े नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. कुणाल घोष पहली बार विधायक बनकर आए हैं और जिस गुट का वह नेतृत्व करने की कोशिश कर रहे हैं, उसके पीछे कोई बड़ा समर्थन नहीं है. दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि वह अकेले ही एक गुट बनाने की कोशिश कर रहे हैं और पार्टी के दूसरे नेताओं के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर रहे हैं.
दिलीप घोष ने कहा कि विधानसभा किसी भी पार्टी की आंतरिक लड़ाई या गुटबाजी का मंच नहीं है. सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी है और अगर कोई सदस्य बार-बार कार्यवाही में बाधा डालता है तो अध्यक्ष की ओर से कार्रवाई करना सही कदम है. उन्होंने कहा कि कुणाल घोष के निलंबन का फैसला इसलिए लिया गया, क्योंकि वह लगातार सदन की कार्यवाही में व्यवधान पैदा कर रहे थे.
वहीं, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के संसद से निलंबन को लेकर दिलीप घोष ने कहा कि कल्याण बनर्जी का यह व्यवहार कोई नई बात नहीं है, बल्कि लंबे समय से उनका यही रवैया रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी पहले भी अपनी ही पार्टी के नेताओं और सांसदों के साथ विवादों में रहे हैं. महिला सांसदों के साथ उनके व्यवहार को लेकर भी कई बार शिकायतें सामने आई हैं. उन्होंने कहा कि बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद कार्रवाई होना स्वाभाविक है. उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के कई नेता अब अपना आपा खो रहे हैं, क्योंकि पार्टी के सामने Political संकट खड़ा हो गया है.
21 जुलाई के कार्यक्रम के दौरान कल्याण बनर्जी द्वारा Chief Minister ममता बनर्जी से उंगली दिखाकर बात करने के वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने कहा कि यह उनका पुराना व्यवहार है. संसद में भी कई बार उनके आचरण को लेकर सवाल उठ चुके हैं. इस तरह का व्यवहार किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर क्या विवाद चल रहा है, यह टीएमसी का आंतरिक मामला है और उसे खुद संभालना चाहिए, लेकिन सांसद और विधायक के रूप में चुने गए नेताओं को अपनी जिम्मेदारी और पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए. जनता ने उन्हें काम करने के लिए चुना है, इसलिए उन्हें जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए.
टीएमसी के चुनाव चिह्न और संगठन की स्थिति को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी दिलीप घोष ने टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि पार्टी इस समय भ्रम की स्थिति में है. टीएमसी के नेता और कार्यकर्ता यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि भविष्य में किस दिशा में जाना है.
–
पीआईएम/
Skip to content