
New Delhi, 10 अगस्त . BJP MP अशोक मित्तल ने डिजिटल एडिक्शन, महिला आरक्षण, डिलिमिटेशन, Jharkhand में छात्रों के प्रदर्शन और संसद में जारी गतिरोध समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने डिजिटल एडिक्शन को युवाओं और बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए Government से व्यापक नीति और सख्त नियमन की जरूरत पर जोर दिया. साथ ही, उन्होंने विपक्ष से संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की.
अशोक मित्तल ने डिजिटल एडिक्शन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनका यह मामला शून्यकाल में 11वें नंबर पर लगा था, लेकिन संसद की कार्यवाही नहीं चल पाने के कारण वह इसे सदन में नहीं उठा सके. ड्रग एडिक्शन निश्चित तौर पर खतरनाक है, लेकिन मौजूदा दौर में डिजिटल एडिक्शन भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है, क्योंकि इसका दायरा बहुत व्यापक है. बच्चों और युवाओं में लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत को प्रभावित कर रहा है. लोकल सर्किल की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए मित्तल ने कहा कि 9 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों में एक बड़ा वर्ग रोजाना लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिता रहा है. यह स्थिति चिंता का विषय है और इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है.
BJP MP ने कहा कि बजट से पहले संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में भी डिजिटल एडिक्शन को देश के सामने उभरती महत्वपूर्ण समस्याओं में शामिल किया गया था. उन्होंने दावा किया कि अत्यधिक डिजिटल इस्तेमाल बच्चों में एंग्जायटी, नींद से जुड़ी समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां पैदा कर सकता है.
ऑनलाइन गेमिंग और social media के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए अशोक मित्तल ने कहा कि कई मामलों में बच्चों और युवाओं पर इसका गंभीर असर देखने को मिलता है. उन्होंने Gujarat, गाजियाबाद और चंडीगढ़ के कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े विवादों ने कई परिवारों को प्रभावित किया है. ऐसे मामलों को केवल व्यक्तिगत समस्या मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि इनके पीछे मौजूद व्यापक डिजिटल एडिक्शन की समस्या को समझना होगा.
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए social media पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और डेनमार्क जैसे देश भी बच्चों की social media पहुंच को लेकर नियम बनाने पर विचार कर रहे हैं. India को भी बच्चों की उम्र के आधार पर social media के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कानून और नियम बनाने पर विचार करना चाहिए. मित्तल ने यह भी कहा कि केवल उम्र पूछ लेने या ‘यस-नो’ के विकल्प के जरिए एज वेरिफिकेशन करना पर्याप्त नहीं है. व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्धारित उम्र से कम बच्चों को प्रतिबंधित कंटेंट या प्लेटफॉर्म तक आसानी से पहुंच न मिले.
उन्होंने टेलीकॉम और डिजिटल कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनियां अलग-अलग तरह के प्लान और सेवाएं बेचती हैं. ऐसे में अकादमिक और मनोरंजन से जुड़े इस्तेमाल को अलग करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है. उन्होंने एल्गोरिदम के जरिए बच्चों और युवाओं को लगातार एक जैसे कंटेंट, विज्ञापन और मनोरंजन सामग्री दिखाए जाने को भी चिंता का विषय बताया. डिजिटल प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम और कंटेंट पुश सिस्टम पर भी किसी न किसी स्तर पर नियमन की जरूरत है.
BJP MP ने कहा कि केवल कानून बनाने से डिजिटल एडिक्शन की समस्या का समाधान नहीं होगा. इसके लिए स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों को जागरूक करना होगा. साथ ही अभिभावकों को भी डिजिटल लत के खतरों और बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर जागरूक किया जाना चाहिए. Government, स्कूल, कॉलेज, अभिभावक और टेक्नोलॉजी कंपनियां मिलकर काम करें, तभी डिजिटल एडिक्शन को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है.
महिला आरक्षण व डिलिमिटेशन के मुद्दों और संसद में जारी गतिरोध पर अशोक मित्तल ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की. उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष के पास अपनी बात रखने का पूरा अवसर होता है और अगर विपक्ष Government को किसी मुद्दे पर घेरना चाहता है तो उसे सदन में खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए. संसद चलने से विपक्ष को भी फायदा होगा, क्योंकि वह अपनी बात जनता के सामने रख सकता है. यदि विपक्ष की दलीलें सही हैं तो इससे Government की जवाबदेही बढ़ेगी और Government को असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.
विपक्ष के विरोध के तरीके पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा अवसर विपक्ष को छोड़ना नहीं चाहिए, लेकिन शायद विपक्ष के पास कहने के लिए पर्याप्त कंटेंट नहीं है, इसलिए सदन को बाधित किया जा रहा है. विपक्ष को जनता के सामने और संसद के माध्यम से खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए.
Jharkhand में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर अशोक मित्तल ने कहा कि किसी छात्र या किसी अन्य व्यक्ति के साथ गलत नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर किसी स्तर पर Government से गलती हुई है तो उसे सुधारने की जरूरत है. India Government ने बच्चों की बात को समझा है और Jharkhand Government से भी उनका आग्रह है कि छात्रों की जो जायज मांगें हैं, उन्हें स्वीकार किया जाए. इससे न केवल छात्रों की समस्या का समाधान होगा, बल्कि राज्य और देश में शांति का माहौल भी बनेगा.
जंतर-मंतर पर विपक्ष की ओर से चर्चा की मांग को लेकर पूछे गए सवाल पर अशोक मित्तल ने कहा कि Government खुले मन से चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर गृह मंत्री सदन में जवाब देंगे. Government की ओर से संबंधित मुद्दे पर सदन में जवाब दिया जाएगा और विपक्ष के पास अपनी बात रखने का अवसर रहेगा.
सुखबीर सिंह बादल और Prime Minister Narendra Modi की मुलाकात को लेकर भी अशोक मित्तल ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सुखबीर सिंह बादल को पंजाब का बड़ा नेता बताते हुए कहा कि Prime Minister Narendra Modi विभिन्न नेताओं और लोगों को समय देते हैं. वहीं, गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि गठबंधन होगा या नहीं, यह बाद की बात है. फिलहाल, पंजाब से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं और संभव है कि दोनों नेताओं के बीच राज्य की समस्याओं को लेकर चर्चा हुई हो. साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि Prime Minister Narendra Modi पंजाब से जुड़े मुद्दों पर काम करेंगे.
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/डीकेपी
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