पाकिस्तान: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर क्या सच बोलना पड़ा भारी! इमरान खान की बहन नूरीन को साइबर एजेंसी ने भेजा समन

इस्लामाबाद, 19 जुलाई . Pakistan के पूर्व Prime Minister इमरान खान की बहन नूरीन नियाजी ने एक ‘सच’ बोला. सच जो ऑपरेशन सिंदूर में India की कामयाबी और Pakistan की नाकामी को बयां करता है. नूरीन का ये वीडियो social media पर वायरल हो गया. इसके बाद Pakistan की राष्ट्रीय साइबर क्राइम जांच एजेंसी (एनसीसीआईए) होश में आई. राज्य संस्थानों के खिलाफ कथित रूप से “भ्रामक, आपत्तिजनक और भड़काऊ” सामग्री social media पर साझा करने के आरोप में उन्हें तलब किया गया है.

हाल ही में वायरल हुए एक इंटरव्यू में नूरीन ने Pakistan-India सैन्य संघर्ष को लेकर दावा किया कि भारत, जो उससे काफी बड़ा देश है, उसके सामने Pakistanी सेना की हालत खराब हो गई थी. एजेंसी ने उन्हें 20 जुलाई (Monday ) को इस्लामाबाद स्थित कार्यालय में पेश होने का नोटिस जारी किया है.

प्रमुख स्थानीय दैनिक डॉन के अनुसार, 18 जुलाई को जारी नोटिस में एजेंसी ने कहा कि नूरीन नियाजी पर राज्य संस्थानों को बदनाम करने और फर्जी नैरेटिव फैलाने के उद्देश्य से social media पर “भ्रामक, आपत्तिजनक और भड़काऊ” सामग्री साझा करने का आरोप है.

नोटिस में कहा गया है, “आपको राज्य संस्थानों को बदनाम करने और फर्जी नैरेटिव फैलाने के लिए झूठी, आपत्तिजनक और भड़काऊ social media सामग्री प्रसारित करते हुए पाया गया है.”

नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि नूरीन तय तारीख पर पेश नहीं होती हैं, तो यह माना जाएगा कि उनके पास अपने बचाव में कहने या प्रस्तुत करने के लिए कुछ नहीं है. साथ ही चेतावनी दी गई है कि नोटिस की अवहेलना करना Pakistan दंड संहिता की धारा 174 के तहत दंडनीय अपराध है.

हालांकि, नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें किस विशेष social media पोस्ट या बयान के संबंध में तलब किया गया है. लेकिन यह समन ऐसे समय जारी हुआ है जब उनका ऑपरेशन सिंदूर वाला वीडियो social media पर तेजी से वायरल हो रहा है.

एक इंटरव्यू में Pakistan के हालात के बारे में बात करते हुए नूरीन नियाजी ने कहा, “Pakistan की फौजी ताकतों की हालत भारतीय हमले के सामने बहुत खराब हो गई थी. India के हमले के बाद Pakistan ने इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाया. Pakistanी सेना इसे संभालने में पूरी तरह से विफल रही. इसके बाद रावलपिंडी के फौजी मुख्यालय में हड़‌बड़ी मच गई, जिस सैन्य अभियान को इन्होंने मारका-ए-हक’ के नाम से शुरू किया था.”

नियाजी के मुताबिक, “वह बुरी तरह से खत्म होने लगा. इसके बाद Pakistanी नेतृत्व ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से India के साथ समझौता करने की गुहार लगाई. कुछ दिन पहले तक, जो डोनाल्ड ट्रंप इस मामले से दूर थे, वह Pakistan के सामने कुछ शर्तें रखकर बात करने को तैयार हो गए.”

नूरीन नियाजी के मुताबिक India के इजरायल के साथ अच्छे संबंध है. ट्रंप ने Pakistan के सामने इजरायल को मान्यता देने और अब्राहम अकोर्ड के साथ-साथ कुछ अन्य शर्तें रखीं. “Pakistan का सैन्य प्रशासन भारतीय हमलों से इतना बौखला गया था कि वह इजरायल को मान्यता देने के लिए तुरंत तैयार हो गया. वहीं दूसरी और India ने भी दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन के अवसर को देखते हुए हमलो की तीव्रता को कम कर दिया.”

नियाजी ने कहा कि भारत-Pakistan संघर्ष के खत्म होने के बाद आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ ने जनता के बीच ‘ड्रामा’ किया. इसे अपनी जीत बताकर परोसना शुरू कर दिया. Pakistanी सैन्य प्रशासन चाहता था कि इस जीत की खुशी में इजरायल को मान्यता देने से उठने वाले आक्रोश को दबा दिया जाए. ऐसा कुछ हो पाता, इससे पहले ही ईरान का मुद्दा शुरू हो गया और यह बात टल गई.

केआर/