
New Delhi, 14 जुलाई . धार भोजशाला मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता वरुण सिन्हा ने याचिकाकर्ता जितेंद्र बिसेन की ओर से चल रही कानूनी कार्यवाही पर प्रतिक्रिया व्यक्त की.
उन्होंने Tuesday को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भोजशाला मामले में Supreme Court में मुस्लिम पक्ष की ओर से विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की गई थी. आज चारों एसएलपी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया. आज इस मामले में सुनवाई हुई और कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किया गया है.
उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष की ओर से बार-बार कहा जा रहा था कि वो स्टेटस को एंटी बहाल कर दे. लेकिन, हम लोगों की ओर से विरोध जताया गया था, क्योंकि कोर्ट ने अपने फैसले में एएसआई के 2023 के दिए आदेश को निरस्त कर दिया है. ऐसी स्थिति में स्टेटस को एंटी नहीं कहा जा सकता है. Government और प्रशासन की ओर से सामाजिक सौहार्द को देखते हुए कई तरह के बदलाव किए गए हैं. ऐसी स्थिति में कोर्ट ने स्टेटस को एंटी कहने से इनकार कर दिया. लेकिन, एक अंतरिम व्यवस्था की गई है, जिसके तहत भोजशाला परिसर में खाली जगह पर Friday के दिन मुस्लिम पक्ष की ओर से नमाज अदा किया जा सकता है. हालांकि, मुस्लिम पक्ष की ओर से बार-बार कहा जा रहा था कि उन्हें परिसर के अंदर ही नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए. लेकिन, कोर्ट ने उन्हें ऐसा आदेश देने से इनकार कर दिया.
उन्होंने कहा कि डायरेक्शन नंबर 7 में India Government और एएसआई को मैनेजमेंट करने का अधिकार दिया गया है. इसके अलावा, यह साफ किया गया है कि बिना Supreme Court के आदेश के बुनियादी बदलाव नहीं किए जा सकते हैं. अगर बदलाव करना है, तो इसके लिए पहले केंद्र Government की अनुमति लेनी होगी. अब मामले पर अंतिम सुनवाई तीसरे हफ्ते में होगी. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मेरिट के आधार पर सुनवाई होगी.
अधिवक्ता वरुण सिन्हा के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि यह सबकुछ जल्दबादी में किया जा रहा है. लेकिन, Supreme Court ने कहा कि यह मामला बहुत संवेदनशील है. अगर प्रशासन की ओर से अंतरिम आदेश दिया गया है, तो आप किसी भी प्रकार से अंतरिम आदेश की प्रार्थना नहीं कर सकते हैं और न ही आप आरोप लगा सकते हैं. आज Supreme Court ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इसके निस्तारण का आदेश दिया है.
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एसएचके/एबीएम
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