
New Delhi, 25 मई . पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित फाल्टा पिछले महीने अचानक राष्ट्रीय चर्चा में छा गया. वहां का स्थानीय Political मुकाबला इतना तीखा और नाटकीय था कि उसे फिल्मी अंदाज में सिंघम बनाम पुष्पा का टकराव बताकर पेश किया जाने लगा. यह टकराव जल्द ही लोगों के बीच चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया.
सिंघम का लेबल भारतीय Police सेवा (आईपीएस) अधिकारी अजय पाल शर्मा के लिए था, जो अपनी सख्त Policeिंग और उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर जाने जाते हैं. उन्हें फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव आयोग के Police पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया गया था, जहां वे चुनावी मुद्दों को सुलझाने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में शामिल रहे हैं.
तेलुगू ब्लॉकबस्टर फिल्म से लिया गया नाम ‘पुष्पा’ तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अपनी मजबूती, बेबाकी और जमीनी स्तर पर अपनी लोकप्रियता को दिखाने के लिए इस्तेमाल किया था. हालांकि जहांगीर खान जिन्हें कुछ हलकों में एक स्थानीय बाहुबली के तौर पर बताया जाता है, उन्होंने उपचुनाव की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया. उनका दावा था कि यह फाल्टा में शांति और विकास सुनिश्चित करने के किया गया.
29 अप्रैल को हुई वोटिंग को चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ और दूसरी गड़बड़ियों के आरोपों के चलते रद्द कर दिया था. 21 मई को पुनर्मतदान में भाजपा के उम्मीदवार ने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उम्मीदवार को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया, जबकि तृणमूल कांग्रेस चौथे स्थान पर रही.
नतीजों से पता चलता है कि 71 प्रतिशत वोट भाजपा को मिले, जबकि सीपीआई (एम) को 19 प्रतिशत वोट मिले. संयोग से, 2024 के Lok Sabha चुनाव में वामपंथी पार्टी को 1 प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे. उस समय तृणमूल को 89 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन अब यह घटकर सिर्फ चार प्रतिशत रह गए.
रिपोर्टों के अनुसार, इस बार विजेता और उपविजेता को छोड़कर, चुनाव लड़ने वाले बाकी सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. यह इस विधानसभा क्षेत्र के पिछले जनादेशों के बिल्कुल उलट है. यह क्षेत्र डायमंड हार्बर Lok Sabha क्षेत्र का हिस्सा है, जहां तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पार्टी के महासचिव भी हैं. उन्होंने लगातार तीन चुनाव जीते थे.
2024 के Lok Sabha चुनाव में अभिषेक बनर्जी ने अपनी जीत का अंतर बढ़ाकर 7 लाख से अधिक वोटों तक पहुंचा दिया. यह बढ़त 2019 में करीब 3.2 लाख और 2014 में लगभग 71 हजार वोटों की थी. चुनाव आयोग के फॉर्म-20 के अनुसार, 2024 में अभिषेक बनर्जी ने डायमंड हार्बर Lok Sabha सीट के अंतर्गत आने वाले सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी बढ़त हासिल की.
इन सातों विधानसभा क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार और उनके निकटतम भाजपा प्रतिद्वंद्वी के बीच सबसे बड़ा अंतर फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला. यहां लगभग 2.06 लाख पड़े मतों में से अभिषेक बनर्जी ने करीब 1.68 लाख वोटों की भारी बढ़त बनाई.
कुल मिलाकर तृणमूल के उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी को लगभग 15.31 लाख पड़े मतों में से 10.48 लाख से अधिक वोट मिले. खास बात यह रही कि ईवीएम में दर्ज उनके किसी भी वोट को अमान्य घोषित नहीं किया गया. वहीं, डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) के 7,064 वोटों में से 470 मत रद्द कर दिए गए.
इसी तरह राज्य चुनावों में भी, तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों ने 2011 में सीपीआई (एम) फाल्टा सीट जीतने के बाद से लगातार अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाए रखी है. शुरुआत में 27,000 से ज्यादा वोटों का अंतर था, जो 2016 में थोड़ा कम होकर लगभग 23,000 रह गया. फिर 2021 में यह अंतर बढ़कर 40,000 से भी ज्यादा हो गया, जब पार्टी ने एक नए चेहरे को चुनाव मैदान में उतारा.
हालांकि, फाल्टा में तृणमूल का एक और नए चेहरे जहांगीर खान ने पार्टी की ताकत को कमजोर करने का ही काम किया, जिससे डायमंड हार्बर मॉडल की साख को भी धक्का लगा. आलोचकों ने आरोप लगाया कि ये नतीजे सत्ता के खेल और डराने-धमकाने की राजनीति का परिणाम थे, वहीं अभिषेक बनर्जी और उनकी पार्टी ने इन नतीजों का श्रेय प्रशासन की जनकेंद्रित पहलों को दिया. इन पहलों में क्षेत्र में स्वास्थ्य और खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास और पार्टी के मजबूत संगठन की भूमिका शामिल थी.
डायमंड हार्बर मॉडल के नाम से मशहूर इस शब्द को इन दो अलग-अलग दृष्टिकोणों के चलते, जहांआलोचनाओं का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ इसकी जमकर तारीफ भी हुई. विधानसभा के दूसरे क्षेत्रों में, जहां तृणमूल चार सीटें डायमंड हार्बर, बिष्णुपुर, महेशतला, बज-बज और मेटियाबुरुज बचाने में कामयाब रही, वहीं भाजपा ने सतगछिया सीट पर 401 वोटों के मामूली अंतर से कब्जा कर लिया.
लेकिन असली प्रतिष्ठा की लड़ाई तो फाल्टा में मानी जा रही थी, जिसकी मुख्य वजह सिंघम बनाम पुष्पा का नैरेटिव था. कई लोगों ने पहले ही फाल्टा में भाजपा की जीत की भविष्यवाणी कर दी थी, खासकर तब जब तृणमूल को कुल मिलाकर करारी हार का सामना करना पड़ा था. इस बात में भी शायद ही किसी को कोई शक था कि जीत का अंतर काफी बड़ा होगा, लेकिन उपचुनाव के जो नतीजे सामने आए, उनकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी. खासकर तब, जब महज दो साल पहले ही अभिषेक बनर्जी ने डायमंड हार्बर मॉडल के दम पर जबरदस्त जीत हासिल की थी.
–
डीकेएम/
Skip to content