महिला किसानों को सशक्त बनाने में महाराष्ट्र देश में अग्रणी: उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार

Mumbai , 2 जुलाई . Maharashtra विधानसभा में Thursday को ऐतिहासिक ‘Maharashtra महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026’ पर चर्चा हुई. विधेयक का स्वागत और समर्थन करते हुए उपChief Minister सुनेत्रा अजित पवार ने इसे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली महिला किसानों को न्याय, पहचान और अधिकार प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया.

विधानसभा में हुई बहस के दौरान, उपChief Minister सुनेत्रा पवार ने इस बात पर जोर दिया कि Maharashtra ऐसा कानून लाने वाला India का पहला राज्य बन गया है.

उन्होंने कहा कि यह विधेयक सिर्फ एक कानून नहीं है; यह हर उस महिला किसान की मेहनत, गरिमा और अधिकारों के लिए ऐतिहासिक न्याय है जो हमारी मिट्टी को जीवन देती है और Maharashtra की अर्थव्यवस्था को मजबूती से सहारा देती है. यह विधेयक राज्य भर में लाखों महिलाओं के जीवन को बदलने वाला है.

एक किसान परिवार की बेटी के रूप में अपनी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से प्रेरणा लेते हुए उपChief Minister ने खेती की कठिनाइयों, प्रकृति की अनिश्चितता और ग्रामीण जीवन के अपने घनिष्ठ अनुभव को साझा किया.

उन्होंने बताया कि बुवाई, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन से लेकर फसल कटाई के बाद की प्रक्रिया तक, विभिन्न कार्यों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के बावजूद, महिलाओं को ऐतिहासिक रूप से कभी भी आधिकारिक ‘किसान’ के रूप में मान्यता नहीं मिली है. भूमि स्वामित्व की कमी के कारण, महिलाएं लंबे समय से विभिन्न सरकारी लाभों से वंचित रही हैं.

इस अंतर को दूर करते हुए उपChief Minister ने नए कानून की एक प्रमुख विशेषता समझाई. उन्होंने कहा कि ‘Maharashtra महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026’ के तहत, किसी महिला को आधिकारिक ‘महिला किसान प्रमाण पत्र’ प्रदान करने के लिए भूमि स्वामित्व के बजाय कृषि में उसकी वास्तविक भागीदारी को प्राथमिक मानदंड बनाया गया है.

उपChief Minister ने स्पष्ट किया कि यह प्रमाण पत्र अंततः लाखों महिलाओं को एक आधिकारिक पहचान प्रदान करेगा, जिससे सरकारी कृषि योजनाओं और प्रशिक्षण, फसल बीमा, संस्थागत ऋण, बाजार पहुंच, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसरों तक उनकी पहुंच आसान हो जाएगी.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि विधेयक केवल एक घोषणा बनकर न रह जाए बल्कि सार्थक कार्रवाई में तब्दील हो, एक सुदृढ़ संस्थागत ढांचा स्थापित किया जाएगा. इसमें एक समर्पित महिला किसान डेटाबेस, एक महिला किसान सशक्तिकरण प्रकोष्ठ, विशेष सहायता अधिकारी, एक राज्य स्तरीय निगरानी समिति और एक समर्पित महिला किसान कोष शामिल हैं.

संभावित चिंताओं को दूर करते हुए उपChief Minister सुनेत्रा पवार ने सदन को स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया कि विधेयक किसी भी मौजूदा भूमि स्वामित्व, उत्तराधिकार या उत्तराधिकार कानूनों में कोई परिवर्तन, संशोधन या हस्तक्षेप नहीं करता है. इसका एकमात्र उद्देश्य कृषि में महिलाओं के अमूल्य योगदान को कानूनी और संस्थागत मान्यता प्रदान करना है.

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