कांवड़ यात्रा मार्ग से मांस-मदिरा की दुकानों को हटाने की मांग, एबीएपी ने कहा- शांतिपूर्ण यात्रा के लिए जरूरी

हरिद्वार, 21 जुलाई . उत्तराखंड में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) ने कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए Government से कांवड़ मार्ग पर स्थित मांस और शराब की दुकानों को बंद करने या हटाने की मांग की है. परिषद का कहना है कि यात्रा के दौरान इन दुकानों की मौजूदगी से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित होती हैं और विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंडलेश्वर और मीडिया समन्वयक करौली शंकर महादेव ने से बातचीत के दौरान कहा, “अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से हम मांग करेंगे, संतों की ओर से मांग करेंगे कि रास्ते में पड़ने वाली मांस-मदिरा की दुकानों को हटाया जाना चाहिए. पूरी कांवड़ यात्रा के दौरान इन्हें वहां से हटाया जाना चाहिए.”

उन्होंने कहा, “इसका बहुत दुष्प्रभाव पड़ता है. क्योंकि कांवड़िये अपनी धार्मिक यात्रा में लगे होते हैं. कभी-कभी उनके साथ आए लोग, क्षेत्रीय लोग या राह चलते लोग जब नशे का सेवन करते हैं, तो वहां विवाद और अव्यवस्था की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. दूसरी बात यह है कि जब हम सात्विक विचारधारा के साथ अपने घर से हरिद्वार के लिए कांवड़ लेकर निकलते हैं, तो रास्ते में ऐसी चीजें देखकर मन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसलिए बहुत जरूरी है कि मांस और शराब की दुकानों को यात्रा के दौरान बंद किया जाए. अन्यथा इन्हीं कारणों से कई तरह के विकार और समस्याएं पैदा होती हैं. इनसे बचने के लिए Government को कठोर कदम उठाने चाहिए और कांवड़ यात्रा के दौरान इन दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए.”

करौली शंकर महादेव ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर प्रशासन के साथ होने वाली बैठकों में भी जानकारी दी जाएगी. उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद की ओर से Chief Minister और प्रशासन से इस मामले में आवश्यक कदम उठाने की अपील की जाएगी.

उन्होंने कहा, “इस पर कठोर कदम उठाए जाएं, ताकि कांवड़ यात्रा सुगमता से संपन्न हो और किसी प्रकार का उपद्रव, दंगा, बवाल या फसाद न हो. शराब और मांस-मदिरा जैसी चीजें कई बार अनावश्यक तनाव और विवाद की स्थिति पैदा करती हैं. यदि यात्रा के दौरान इन पर रोक लगाई जाएगी, तो काफी हद तक समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा. इसलिए इस दिशा में निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए.”

पीआईएम/एएस