देहरादून में नवनिर्मित पुल की एप्रोच रोड बारिश में क्षतिग्रस्त, कार्रवाई की मांग

देहरादून, 28 जुलाई . देहरादून के प्रेमनगर स्थित टोंस नदी पर नंदा की चौकी के पास हाल ही में 16 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल रातभर हुई भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया. घटना के बाद कांग्रेस ने संग्राम सिंह पुंडीर के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया, जबकि स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और Government की कार्यशैली पर सवाल उठाए.

कुछ दिन पहले ही उद्घाटन किए गए इस पुल के अप्रोच रोड के पास लगातार बारिश के कारण बड़ा गड्ढा हो गया. इससे इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई.

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या हाल ही में बनाए गए इस ढांचे को उत्तराखंड में हर साल आने वाली मॉनसून की भारी बारिश और बाढ़ को ध्यान में रखकर सही तरीके से तैयार किया गया था.

नुकसान को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने स्पष्ट किया कि पुल के मुख्य ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त अप्रोच रोड की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है.

से बातचीत में चौहान ने कहा, “इस मामले में हमारा चौबीस घंटे और सात दिनों तक कंट्रोल रूम पहले ही सक्रिय कर दिया गया था और तुरंत अतिरिक्त टीमें तैनात कर दी गई थीं. पुल पूरी तरह सुरक्षित है. पुल तक जाने वाली सड़क को नुकसान पहुंचा है, जिसकी मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है. सभी मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और मरम्मत कार्य की निगरानी कर रहे हैं.”

इस बीच, पुल को हुए नुकसान को लेकर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया. पार्टी नेता संग्राम सिंह पुंडीर ने प्रोजेक्ट को पूरा करने में हुई “गंभीर लापरवाहियों” पर सवाल उठाए और Government से जवाब मांगा.

से बातचीत में पुंडीर ने सवाल उठाया कि हाल ही में उद्घाटन किए गए पुल को बनने के कुछ ही दिनों बाद इतना नुकसान कैसे हो सकता है.

उन्होंने कहा, “यह पुल अभी हाल ही में बना था. लेकिन, सिर्फ 16 दिनों के अंदर ही इसमें नुकसान हो गया. यह एक बड़ी लापरवाही है. भले ही जिलाधिकारी इसे पुल के एक छोटे हिस्से को नुकसान पहुंचने की घटना बता रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि इस रास्ते पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है. पहले ऐसी घटनाओं के बाद संबंधित मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देते थे, लेकिन अब ऐसा देखने को नहीं मिलता.”

कांग्रेस नेता ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण की जांच की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

उन्होंने कहा, “जिस इंफ्रास्ट्रक्चर का उद्देश्य लोगों की सुविधा के लिए था, वह अब मलबे में बदल गया है. हम इस मुद्दे को मजबूती से उठा रहे हैं और मांग करते हैं कि नए बने पुल को इतनी जल्दी नुकसान कैसे पहुंचा, इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए. यह बेहद चिंताजनक है कि 16 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल सिर्फ 16 दिनों में ही क्षतिग्रस्त हो गया. इससे Government और निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.”

पुंडीर ने स्थानीय विधायकों पर भी उचित कार्रवाई न करने का आरोप लगाया. उन्होंने उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतपाल महाराज पर निशाना साधते हुए प्रोजेक्ट के काम और निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदार को लेकर जवाब मांगा.

उन्होंने कहा, “यह पुल हमारे विधानसभा क्षेत्र में आता है. टोंस नदी पर बने पांच पुलों की हालत करीब 20 सालों से खराब है. इनमें किस तरह की कमियां हैं, इसकी जांच होनी चाहिए. सिर्फ 15-16 दिनों में पुल को नुकसान पहुंचना ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता है. हम ठेकेदार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे.”

स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन के दावे पर सवाल उठाए. एक स्थानीय निवासी ने कहा, “पुल के निर्माण को महज 16 दिन हुए हैं और इतनी बड़ी घटना सामने आ गई. जिला मजिस्ट्रेट का बयान आता है कि केवल थोड़ा-सा किनारा क्षतिग्रस्त हुआ है, जबकि यहां पूरी आवाजाही ठप हो चुकी है. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. क्षेत्र के दोनों विधायक और लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) के मंत्री सतपाल महाराज को इस मामले की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.”

उन्होंने कहा कि पहले ऐसे मामलों में संबंधित विभाग के मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते थे, लेकिन अब ऐसा देखने को नहीं मिलता. जिला अधिकारी यह कह रहे हैं कि केवल कोने का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है, जबकि वास्तविकता यह है कि पूरी आवाजाही बंद है. दोनों ओर भारी संख्या में लोग फंसे हुए हैं. यह पुल कई स्कूलों और कॉलेजों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग था. इस मामले की सीबीआई (सीबीआई) से जांच करानी चाहिए.

एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा, “करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल महज 16 दिन में क्षतिग्रस्त हो गया, जो बेहद चिंताजनक है. इससे Government और कार्यदायी संस्था दोनों पर सवाल उठते हैं. लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतपाल महाराज को बताना चाहिए कि यह काम किस एजेंसी को दिया गया और निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान क्यों नहीं रखा गया.”

उन्होंने आगे कहा, “यह हमारा क्षेत्र है. मैंने पहले भी कहा था कि इसी टोंस नदी पर बने अन्य पांच पुल पिछले लगभग 20 वर्षों से सुरक्षित हैं. फिर इस पुल में ऐसा क्या हुआ कि 15-16 दिनों के भीतर ही यह क्षतिग्रस्त हो गया? इस मामले में कार्यदायी संस्था और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. यदि ऐसा नहीं हुआ तो क्षेत्र की जनता आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी.”

एसएचके/पीआईएम/एएस