
Patna, 19 जुलाई . जदयू विधायक श्याम रजक ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की चुनावी अनुपस्थिति, परिसीमन विधेयक समेत कई मुद्दे पर अपनी राय रखी.
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में तेजस्वी यादव के प्रचार में नहीं आने के सवाल पर श्याम रजक ने समाचार एजेंसी से कहा कि चुनाव मैदान में बड़ी संख्या में उम्मीदवार हैं और सभी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. तेजस्वी यादव क्यों नहीं आ रहे हैं, इसका जवाब उनकी पार्टी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता ही दे सकती हैं.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी यादव ने अपनी उम्मीदवार को चुनाव मैदान में अकेला छोड़ दिया है, जबकि वह खुद कहीं और व्यस्त हैं. उम्मीदवार अकेले संघर्ष कर रही हैं और चुनाव इस तरह नहीं लड़ा जाता. विपक्ष केवल अपनी राजनीति करता है और अपना हित साधने के बाद उम्मीदवारों को उनके हाल पर छोड़ देता है.
श्याम रजक ने बांकीपुर विधानसभा सीट को एनडीए का मजबूत गढ़ बताते हुए कहा कि पहले यहां से नितिन नवीन विधायक रहे, बाद में मंत्री बने और फिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. नितिन नवीन से पहले उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी कई बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
जदयू विधायक ने विश्वास जताया कि बांकीपुर की जनता 30 तारीख का इंतजार कर रही है, जब वह ईवीएम पर कमल के निशान का बटन दबाकर भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा को भारी मतों से विजयी बनाएगी और नया रिकॉर्ड स्थापित करेगी.
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश द्वारा परिसीमन विधेयक को लेकर लगाए गए हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों पर श्याम रजक ने कहा कि ऐसे आरोप लगाने का पुराना इतिहास कांग्रेस का रहा है. जो लोग किसी दल में शामिल हो रहे हैं, वे अपनी इच्छा से आ रहे हैं, इसमें किसी प्रकार की खरीद-फरोख्त नहीं है. कांग्रेस के पास इस विधेयक का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का साहस नहीं है, इसलिए वह बेबुनियाद आरोप लगा रही है. उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश के लोगों के हित में लाया गया है, किसी तानाशाही व्यवस्था को स्थापित करने के लिए नहीं. उन्होंने उल्टा कांग्रेस के नेताओं को ही तानाशाही मानसिकता वाला बताया.
परिसीमन विधेयक पर अपनी राय रखते हुए श्याम रजक ने कहा कि परिसीमन समय-समय पर होने वाली एक समयबद्ध प्रक्रिया है. जनसंख्या बढ़ने के साथ Lok Sabha और विधानसभा क्षेत्रों का आकार भी जनसंख्या के आधार पर तय किया जाता है. आज कई विधानसभा क्षेत्रों में 4 से 5 लाख लोग रहते हैं, जबकि कई Lok Sabha क्षेत्रों की आबादी 16 से 17 लाख तक पहुंच गई है, इसलिए परिसीमन आवश्यक है. संसद से विधेयक पारित होने के बाद एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें सत्ता पक्ष, विपक्ष और अन्य Political दलों के सदस्य शामिल होंगे. यही समिति मिलकर परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी.
उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय और संसद में बागी टीएमसी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था के मुद्दे पर श्याम रजक ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून लागू होने के बाद उसके तहत निर्णय लेने का पूरा अधिकार Lok Sabha अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के पास होता है.
उन्होंने कहा कि यदि सांसद सामूहिक रूप से किसी दूसरे दल में विलय की इच्छा जताते हैं और वह बहुमत के आधार पर उचित पाया जाता है तो Lok Sabha अध्यक्ष को उस विलय को स्वीकार करने और प्रक्रिया पूरी कराने का अधिकार है. इसी तरह यदि टीएमसी के सांसद बहुमत के आधार पर अलग बैठने की मांग करते हैं तो स्पीकर उन्हें अलग बैठने की अनुमति दे सकते हैं.
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मुद्दे पर श्याम रजक ने कहा कि उनके साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं और वह उनका सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि पहले भी उनसे भूख हड़ताल समाप्त कर अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से संघर्ष जारी रखने की अपील की गई थी, लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो Government की जिम्मेदारी बन गई कि उनके स्वास्थ्य की रक्षा करे. इसी उद्देश्य से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, ताकि उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रहे.
Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल से हटाए जाने पर केंद्र की आलोचना करने के सवाल पर श्याम रजक ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि वर्ष 1974 में सत्ता में कौन था और ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय देश की Government किसकी थी. कांग्रेस ने हिंसा के सहारे शासन किया, लोगों को जेल भेजा और अनेक लोगों की जान गई. आज वही कांग्रेस उन लोगों पर हिंसा का आरोप लगा रही है, जो महात्मा गांधी के अहिंसा के मार्ग पर चलने की बात करते हैं. कांग्रेस के नेता तानाशाही सोच रखते हैं और उनकी टिप्पणियां इतनी निराधार हैं कि उनका जवाब देना भी जरूरी नहीं है.
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डीकेपी
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