
New Delhi, 29 जुलाई . दिल्ली Police ने Wednesday को social media पर चल रहे उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगी थी.
Police ने वायरल वीडियो और उससे जुड़े दावों को गुमराह करने वाला बताया और कहा कि मेडिकल सबूतों से इनकी पुष्टि नहीं होती है.
दिल्ली Police ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि सेंट्रल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगने के आरोपों की पुष्टि घटना के बाद तैयार की गई मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट से नहीं हुई.
Police ने कहा, “social media पर फैल रहे ये दावे कि 20 जुलाई को सेंट्रल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगी थी, एमएलसी की जांच के नतीजों से मेल नहीं खाते हैं.”
Police के अनुसार, एमएलसी में दाहिने ट्रैगस (कान के पास कार्टिलेज का छोटा उभार) के सामने एक कटे-फटे घाव का जिक्र है और चोट को ‘ब्लंट’ (किसी कुंद चीज से लगी चोट) की श्रेणी में रखा गया है.
बयान में कहा गया, “डॉक्टर की राय में चोट को मामूली बताया गया है और गोली लगने के घाव का कोई सबूत नहीं है, इसलिए गोली लगने से चोट का दावा एमएलसी में बताई गई मेडिकल जांच के नतीजों से साबित नहीं होता है.”
Police ने नागरिकों से social media प्लेटफॉर्म पर जानकारी देखते और शेयर करते समय सावधानी बरतने की भी अपील की.
Police ने आगे कहा, “लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे दावों को शेयर करने से पहले भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी की पुष्टि कर लें.”
एमएलसी, या मेडिको-लीगल केस रिपोर्ट, एक मेडिकल दस्तावेज है जिसे चोटों या ऐसी स्थितियों के मामलों में तैयार किया जाता है जिनमें कानूनी जांच की जरूरत पड़ सकती है. कानून लागू करने वाली एजेंसियां अक्सर चोटों की प्रकृति का पता लगाने और मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए ऐसी रिपोर्टों पर भरोसा करती हैं.
20 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन हिंसक हो गए, जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में भीड़ ने जंतर-मंतर विरोध स्थल से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की.
Police ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ी और लाठीचार्ज किया, जिससे झड़पें हुईं और कई लोगों को हिरासत में लिया गया.
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एससीएच/डीकेपी
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