दिल्ली हाईकोर्ट ने बेटी से दुष्कर्म में कायम रखी कलयुगी पिता की उम्रकैद · Indias News

दिल्ली हाईकोर्ट ने बेटी से दुष्कर्म में कायम रखी कलयुगी पिता की उम्रकैद


नई दिल्ली (New Delhi) . बेटी से दुष्कर्म को जघन्य और घृणित अपराध करार देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है.

कोर्ट ने कहा, संरक्षक और सभी मुश्किलों की ढाल कहे जाने वाले पिता ने ही बच्ची की अस्मिता से खिलवाड़ किया है. ऐसे में सजा को कम नहीं किया जा सकता. जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संगिता ढिंगरा सहगल की पीठ ने कहा, जब पिता पुत्री का पवित्र रिश्ता इस तरह नष्ट होता होता है तो यह मानवीय विवेक को बड़ा झटका देता है. पीठ ने कहा, इसमें कोई शक नहीं कि दुष्कर्म एक जघन्य अपराध खुद है लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो यह जघन्य और घृणित अपराध की श्रेणी में आता है. यह मानव जाति के लिए खतरा है. साथ ही पीठ ने दोषी पिता की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें उसने निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी.

इसमें दलील दी थी कि उसकी उम्र 56 वर्ष है और उसके दो अविवाहित बेटे हैं जिनकी जिम्मेदारी उस पर है. इसलिए उसकी सजा को घटाकर 10 वर्ष कर दिया जाए. पीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध खासकर यौन शोषण के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में यह आवश्यक है कि हम अपने विधायी ज्ञान का पालन करें और सम्मान करें, क्योंकि दुष्कर्म या इसका प्रयास किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध नहीं है बल्कि यह सामाजिक वातावरण के बुनियादी संतुलन को नष्ट करने का दुस्साहस है. यह सिर्फ एक महिला की गरिमा को कम नहीं करता बल्कि उसे मार भी देता है.

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