
New Delhi, 24 जुलाई . 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर यह तय करना न्यायालय का विषय नहीं है कि मामले की जांच कौन-सी एजेंसी करेगी. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह अपनी मांग संबंधित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष रख सकते हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, “याचिका में जांच की मांग की गई है, जबकि जांच की प्रक्रिया First Information Report दर्ज होने के बाद ही शुरू होती है. किस एजेंसी को जांच सौंपी जाएगी, यह पूरी तरह संबंधित अधिकारियों के विवेकाधिकार का विषय है और फिलहाल न्यायालय इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा.”
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इसे किसी अन्य विशेष एजेंसी, जैसे एनआईए या किसी स्वतंत्र एजेंसी को भी सौंपा जा सकता है. इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि भविष्य में परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि किसी अन्य एजेंसी की जरूरत महसूस हो, तो उस पर संबंधित प्राधिकारी निर्णय ले सकते हैं.
अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई जैसी एजेंसी को जांच सौंपने का निर्णय आमतौर पर प्राथमिक जांच एजेंसी की प्रगति और परिस्थितियों पर निर्भर करता है. फिलहाल वह स्थिति नहीं आई है.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दिल्ली Police से मामले में स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) तलब करने का भी अनुरोध किया. इस पर हाईकोर्ट ने सवाल किया कि आखिर किस उद्देश्य से स्टेटस रिपोर्ट मांगी जाए. अदालत ने पूछा कि क्या यह जिम्मेदार लोगों की पहचान से जुड़े किसी प्रतिनिधित्व के लिए आवश्यक है?
इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, “प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी हुई. कई जगह सड़कें जाम रहीं, कार्यालय प्रभावित हुए और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त उपचारात्मक कदम नहीं उठाए गए. इसलिए दिल्ली Police से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी जानी चाहिए.”
हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मांग को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि दो-तीन दिन पहले ही इस मामले में First Information Report दर्ज की जा चुकी हैं और अब कानून के अनुसार जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. जब जांच शुरू हो चुकी है तो इस स्तर पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल कराने का कोई औचित्य नहीं बनता.
हाईकोर्ट ने भरोसा जताया कि संबंधित एजेंसियां कानून के मुताबिक कार्रवाई करेंगी और मामले की जांच आगे बढ़ाएंगी.
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एससीएच/
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