दिल्ली हाईकोर्ट ने 200 करोड़ की रंगदारी के मामले में सुकेश चंद्रशेखर के सहयोगी को दी जमानत

New Delhi, 8 जुलाई . दिल्ली हाईकोर्ट ने ठग सुकेश चंद्रशेखर द्वारा किए गए 200 करोड़ रुपये के रंगदारी के मामले में आरोपी वकील बी. मोहनराज को नियमित जमानत दे दी है.

कोर्ट ने कहा कि Maharashtra संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत जमानत की कड़ी शर्तों के बावजूद अंडरट्रायल (मुकदमा चलने तक जेल में बंद) के तौर पर उन्हें जेल में रखना उचित नहीं है.

जस्टिस प्रतीक जालान की सिंगल बेंच ने जमानत याचिका को मंजूरी देते हुए कहा कि मोहनराज 4 साल और 10 महीने जेल में बिता चुके हैं जबकि 24 आरोपियों, 403 सरकारी गवाहों और 10,000 से ज्‍यादा पन्नों की चार्जशीट वाले इस मुकदमे के उचित समय में पूरा होने की संभावना कम है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, “याचिकाकर्ता पहले ही अंडरट्रायल के तौर पर लगभग 4 साल और 10 महीने जेल में बिता चुका है…. ऊपर बताई गई बातें, जिनमें आरोपियों की संख्या (24), गवाहों की संख्या (403) और मामले की जटिलता शामिल है, यह बताती हैं कि कार्यवाही के जल्द पूरा होने की संभावना कम है.”

जस्टिस जालान ने कहा, “अभियोजन पक्ष द्वारा याचिकाकर्ता की भूमिका को देखते हुए, मेरा मानना ​​है कि अंडरट्रायल के तौर पर उन्हें और जेल में रखना उचित नहीं है.”

फैसले में मोहनराज को 2.5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की दो जमानत राशि जमा करने पर रिहा करने का निर्देश दिया गया. इसके साथ ही कुछ शर्तें भी रखी गईं, जैसे अपना पासपोर्ट जमा करना, सुनवाई की हर तारीख पर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होना और गवाहों को प्रभावित न करना या सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करना.

यह मामला अगस्त 2021 में दिल्ली Police स्पेशल सेल द्वारा दर्ज की गई First Information Report से जुड़ा है. इसमें आरोप लगाया गया था कि चंद्रशेखर और उनके सहयोगियों ने एक व्यवसायी की पत्नी से उसके पति को कानूनी राहत दिलाने के बहाने लगभग 217 करोड़ रुपये की रंगदारी वसूली थी.

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि चंद्रशेखर ने अपने सहयोगियों और जेल के भ्रष्ट अधिकारियों की मदद से जेल से ही रंगदारी का सिंडिकेट चलाया था.

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि वकील मोहनराज ने कथित तौर पर अपराध से मिली रकम को तीसरे पक्ष के जरिए चेन्नई में लग्जरी कारें और अचल संपत्ति खरीदने में मदद की और इन लेनदेन के लिए कमीशन लिया. मोहनराज एक वकील हैं और चंद्रशेखर व उनकी पत्नी लीना मारिया पॉल के करीबी सहयोगी है.

अपने हालिया फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि 2023 में मोहनराज की जमानत खारिज करने वाले उसके पिछले फैसले में शुरुआती तौर पर यह पाया गया था कि उन्होंने अपराध से मिली रकम का प्रबंधन करके कथित संगठित अपराध सिंडिकेट की सक्रिय रूप से मदद की थी और वे केवल चंद्रशेखर और पॉल के कानूनी मामलों को नहीं संभाल रहे थे.

हालांकि, जस्टिस जालान ने कहा कि मौजूदा अर्जी अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार और मकोका जैसे विशेष कानूनों के तहत जमानत पर कानूनी प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाने का सवाल उठाती है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने लंबे समय तक जेल में रहने के मामलों पर Supreme Court के हालिया फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि जमानत पर कानूनी प्रतिबंध संवैधानिक सुरक्षा को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकते, खासकर तब जब मुकदमे के उचित समय के भीतर खत्म होने की संभावना न हो.

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल जमानत अर्जी पर फैसला करने तक सीमित थीं और वे मामले के गुण-दोष के आधार पर होने वाले मुकदमे को प्रभावित नहीं करेंगी.

यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा इसी मकोका मामले में लीना मारिया पॉल की जमानत खारिज करने के कुछ हफ्तों बाद आया है. कोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री शुरुआती तौर पर कथित संगठित अपराध सिंडिकेट की गतिविधियों में उनकी संलिप्तता का संकेत देती है.

इसके बाद Supreme Court ने पॉल की जमानत खारिज होने को चुनौती देने वाली स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) पर दिल्ली Police को नोटिस जारी किया है.

पॉल को पहले ही Enforcement Directorate (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग के समानांतर मामले में जमानत मिल चुकी थी.

मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी चंद्रशेखर, पॉल और कई अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के चरण तक पहुंच गया है जबकि Bollywood Actress जैकलीन फर्नांडीज ने खुद को निर्दोष बताया है और मामले में मुकदमे का सामना करने का फैसला किया है.

एएसएच/पीएम