
New Delhi, 11 अगस्त . दिल्ली Government के मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली फायर अमेंडमेंट बिल, 2020 के दिल्ली दंगों, ताहिर हुसैन से जुड़े Political विवाद और दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डीयूएसआईबी) बिल को लेकर Government का पक्ष रखा. उन्होंने फायर एनओसी की प्रक्रिया को आसान बनाने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने की बात कही. वहीं, दिल्ली दंगों के संदर्भ में कथित ‘टूलकिट’, विक्टिमहुड और India की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित करने के प्रयासों का मुद्दा उठाया. साथ ही, उन्होंने डीयूएसआईबी बिल को झुग्गीवासियों के हित से जुड़ा बताते हुए आम आदमी पार्टी पर Political मुद्दों को लेकर Government को घेरने का आरोप भी लगाया.
दिल्ली फायर अमेंडमेंट बिल को लेकर आशीष सूद ने कहा कि मौजूदा प्रावधानों में फायर एनओसी के समय बिल्डिंग बायलॉज के साथ नेशनल बिल्डिंग कोड का भी उल्लेख होने के कारण कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतें सामने आती हैं. इस प्रावधान के चलते एनओसी की प्रक्रिया में अनावश्यक अड़चनें पैदा होती हैं. केंद्र Government की ओर से चलाए जा रहे डी-रेगुलेशन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के प्रयासों के अनुरूप इन प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाना जरूरी है. इसी उद्देश्य से बिल्डिंग बायलॉज/नेशनल बिल्डिंग कोड में से नेशनल बिल्डिंग कोड को हटाकर केवल बिल्डिंग बायलॉज को आधार बनाने का प्रस्ताव है. दिल्ली में समय-समय पर नया मास्टर प्लान या नए बिल्डिंग बायलॉज लागू होंगे तो उन्हीं के आधार पर निर्मित इमारतों के लिए फायर एनओसी देने और लेने की प्रक्रिया संचालित होगी.
आशीष सूद ने कहा कि इससे आम जनता को सुविधा मिलेगी और फायर विभाग की कार्यप्रणाली में भी तेजी आएगी. प्रक्रिया सरल होने से एनओसी हासिल करने में लगने वाली दिक्कतें कम होंगी और व्यापक स्तर पर दिल्ली में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा.
दिल्ली दंगों को लेकर आशीष सूद ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के संदर्भ में जिस कथित ‘टूलकिट’ के इस्तेमाल की बात सामने आती है, उसे जनता के सामने रखना जरूरी है. रास्ता रोकना, विक्टिमहुड का नैरेटिव तैयार करना और India की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल करने जैसे मुद्दों पर सदन में चर्चा होनी चाहिए. अंकित शर्मा की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केवल सजा तक विषय को सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इससे जुड़े कथित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, नैरेटिव और Political गतिविधियों पर भी चर्चा जरूरी है.
मंत्री ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में ताहिर हुसैन के समर्थन में कथित ‘विक्टिमहुड’ का नैरेटिव सामने आया. इन सभी पहलुओं को जनता के सामने रखना जरूरी है और इसके लिए विधानसभा से बेहतर मंच नहीं हो सकता.
कुछ कथित बयानों और गतिविधियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों से जुड़ी घटनाओं को एक ‘टूलकिट’ की तरह इस्तेमाल करने और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मौजूदगी को ‘स्ट्रेटेजिक अपॉर्चुनिटी’ के तौर पर देखने जैसी बातों पर भी जनता का ध्यान जाना चाहिए. इन मुद्दों पर चर्चा का उद्देश्य दिल्ली की जनता को उन परिस्थितियों और कथित रणनीतियों से अवगत कराना है, जिनके जरिए India की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित करने का प्रयास किया गया.
डीयूएसआईबी बिल को लेकर आशीष सूद ने कहा कि पिछले 19 वर्षों में जो नई झुग्गियां बनी हैं, उनमें रहने वाले लोगों के लिए भी बेहतर आवास उपलब्ध कराने की जरूरत है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि Government झुग्गीवासियों के लिए बेहतर घर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है? मंत्री ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी ऐसे कार्यों से Political रूप से असहज महसूस कर रही है. विपक्ष Government के कामों पर चर्चा करने के बजाय अलग-अलग गैर-महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाकर Government को घेरने का प्रयास कर रहा है.
उन्होंने कहा कि कभी साइकिल, कभी चावल और कभी दवाइयों से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष Government का ध्यान भटकाने की कोशिश करता है. डीयूएसआईबी बिल पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसके माध्यम से झुग्गीवासियों के लिए किस तरह की सुविधाएं और बेहतर आवास उपलब्ध कराए जा सकते हैं.
आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए आशीष सूद ने कहा कि विपक्ष को Government के अच्छे काम दिखाई नहीं दे रहे हैं और उसे अपनी Political जमीन खिसकती हुई नजर आ रही है. इसी वजह से गैर-मुद्दों को मुद्दा बनाकर Government को घेरने की कोशिश की जा रही है. कुछ मामलों में कथित तौर पर अपने लोगों या कंपनियों के माध्यम से कराई गई शिकायतों के आधार पर Political विवाद खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है.
विपक्ष पर टिप्पणी करते हुए मंत्री ने आगे कहा कि Government को फिलहाल उसके मुद्दों पर ज्यादा सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि पांच साल बाद विपक्ष Political रूप से प्रासंगिक बना रहा, तभी यह तय किया जाएगा कि उसके सवालों का जवाब देना है या नहीं.
–
Skip to content