ओखला और तुगलकाबाद में नए बायोगैस प्लांट के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर, दिल्ली सीएम रहीं मौजूद

New Delhi, 30 जुलाई . दिल्ली की Chief Minister रेखा गुप्ता ने Thursday को तुगलकाबाद और ओखला में कम्प्रेस्ड बायो-गैस प्लांट लगाने के लिए दिल्ली नगर निगम और ऑयल इंडिया लिमिटेड के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया का नेतृत्व किया.

यह एमओयू दिल्ली और केंद्र Government की उन कोशिशों का हिस्सा है, जिनका मकसद रीमेडिएशन और दूसरी तकनीकों के जरिए लैंडफिल साइट्स पर जमा कचरे के पहाड़ों को कम करना है.

social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, “आज दिल्ली सचिवालय में, दिल्ली नगर निगम और ऑयल इंडिया लिमिटेड के बीच तुगलकाबाद और ओखला में 800 टीडीपी क्षमता वाले कंप्रेस्ड बायो-गैस प्लांट लगाने के लिए एक एमओयू पर साइन किए गए.”

उन्होंने कहा, “इन प्लांट में अलग किए गए ऑर्गेनिक कचरे से बायो-गैस बनाई जाएगी. इससे कचरे के पहाड़ कम होंगे, साफ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा और ‘साफ दिल्ली’ के लिए हमारा संकल्प और मजबूत होगा.”

उन्होंने बताया कि इस मौके पर दिल्ली नगर निगम के मेयर प्रवेश वाही और अन्य अधिकारी मौजूद थे.

इससे पहले, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (एमओएस) कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा था कि दिल्ली-एनसीआर में पहचाने गए सात पुराने कचरा डंपसाइट्स में से चार पर रीमेडिएशन का काम पूरा हो चुका है.

संसद में एक सवाल के जवाब में, राज्य मंत्री ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में रीमेडिएशन के लिए पहचाने गए सात पुराने कचरा डंपसाइट्स में से तीन दिल्ली में हैं और एक-एक गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में हैं.

कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट और पुराने कचरे से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) ने 27 जनवरी, 2021 को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत एक निर्देश जारी किया था. इसमें सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी)/प्रदूषण नियंत्रण समितियों (पीसीसी) को पुराने कचरा डंपसाइट्स की बायो माइनिंग और बायो-रीमेडिएशन के लिए कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था.

उन्होंने कहा कि एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 3 जून, 2025 को एनसीआर की एजेंसियों को निर्देश दिया था कि वे सैनिटरी लैंडफिल साइट्स और डंपसाइट्स पर पुराने कचरे के प्रबंधन के लिए उचित कदम उठाएं.

सीएक्यूएम ने कहा था कि इस इलाके में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) या बायोमास को खुले में जलाने से निकलने वाले पार्टिकुलेट मैटर (पीएम10 और पीएम2.5) और दूसरी हानिकारक गैसों (जैसे एनओ2, एसओ2, सीओ, डाइऑक्सिन, फुरान वगैरह) से होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ये उपाय जरूरी थे.

राज्य मंत्री ने बताया कि केंद्र Government ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2016 की जगह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 लागू किए हैं. नए नियमों में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट के सही और असरदार मैनेजमेंट (सैनिटरी लैंडफिल भी शामिल) के लिए प्रावधान किए गए हैं. ये नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो गए हैं.

एससीएच/एबीएम