
New Delhi, 16 अगस्त . दिल्ली भाजपा के मीडिया प्रमुख और प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने Sunday को आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य और जैतपुर की पार्षद हेमा के पति श्रीचंद वोहरा पर एक दलित कार्यकर्ता को परेशान करने और उसकी संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए इसकी निंदा की. उन्होंने इस मामले पर अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर भी सवाल उठाए.
शंकर कपूर और भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल गुप्ता ने मांग की कि आप नेता अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज अपनी पार्टी के दलित कार्यकर्ता राकेश कुमार को तुरंत न्याय दिलाएं, उसका प्लॉट वापस दिलवाएं और आप राष्ट्रीय परिषद सदस्य श्रीचंद वोहरा तथा उनकी पार्षद पत्नी हेमा को पार्टी से निष्कासित करें.
दिल्ली भाजपा के मीडिया प्रमुख ने कहा कि श्रीचंद वोहरा पार्टी की शुरुआत से ही केजरीवाल के करीबी रहे हैं और उन्होंने 2017 में जैतपुर से नगर निगम चुनाव भी लड़ा था.
इसके बाद 2022 में उनकी पत्नी हेमा ने चुनाव लड़ा और वर्तमान में वह नगर निगम पार्षद हैं.
भाजपा नेताओं के अनुसार, 2019 में श्रीचंद वोहरा ने निजी Political कार्यालय बनाने के बहाने जैतपुर एक्सटेंशन में रहने वाले सक्रिय दलित आप कार्यकर्ता राकेश कुमार का खाली प्लॉट अपने कब्जे में ले लिया.
करीब एक साल बाद राकेश कुमार ने अपना प्लॉट वापस मांगना शुरू किया, लेकिन आरोप है कि वोहरा 2022 तक इस मामले को टालते रहे.
2022 के अंत में वोहरा की पत्नी हेमा जैतपुर से नगर निगम पार्षद चुनी गईं.
भाजपा नेताओं का आरोप है कि इसके बाद दलित कार्यकर्ता राकेश कुमार को परेशान किया जाने लगा. यह कथित उत्पीड़न लगभग दो सप्ताह पहले Police में First Information Report दर्ज होने के बाद ही रुका.
प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि जुलाई 2026 में जब राकेश कुमार ने अपने घर की पहली मंजिल पर बिजली का मीटर लगवाने की कोशिश की, तब श्रीचंद वोहरा ने कथित तौर पर बिजली विभाग को मीटर लगाने से रोक दिया.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लगभग तीन सप्ताह पहले वोहरा ने अपने दलित सहयोगी राकेश कुमार का पहली मंजिल पर रखा सामान सड़क पर फेंक दिया.
कपूर ने कहा, “स्थिति से परेशान होकर राकेश कुमार ने Police से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई.”
जांच के बाद Police ने अब मामले में प्लॉट पर कब्जा करने की साजिश से जुड़ी धाराएं भी जोड़ दी हैं.
भाजपा नेताओं का कहना है कि इस मामले में लगाई गई धाराओं के तहत दोष साबित होने पर 10 साल तक की जेल हो सकती है.
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एएमटी/डीकेपी
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