रक्षा निर्यात, ऊर्जा विविधीकरण और मिलेट्स भारत को आत्मनिर्भर बनाने में निभा सकते हैं बड़ी भूमिका: विशेषज्ञ

New Delhi, 15 अगस्त . रक्षा उत्पादन, कृषि निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में हो रही प्रगति India की आत्मनिर्भरता को नई मजबूती दे सकती है. से बातचीत में विशेषज्ञों ने कहा कि स्वदेशी रक्षा निर्माण, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के विस्तार, मिलेट्स को बढ़ावा और विविध ऊर्जा स्रोतों का विकास India की आर्थिक एवं रणनीतिक शक्ति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर हेमंत महाजन (सेवानिवृत्त) ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में India ने रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 की तुलना में देश का रक्षा उत्पादन लगभग पांच गुना बढ़ चुका है, जबकि मित्र और पड़ोसी देशों को रक्षा निर्यात में करीब 50 गुना की वृद्धि हुई है.

उन्होंने आगे बताया कि घरेलू स्तर पर रक्षा उपकरणों के उत्पादन में वृद्धि से India की रणनीतिक क्षमताएं मजबूत होंगी और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होगी.

महाजन ने से कहा, “आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र केवल आर्थिक लाभ ही नहीं देता, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता बढ़ने से India वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकता है और आपात परिस्थितियों में बाहरी देशों पर निर्भरता से बच सकता है.”

वहीं, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट आदित्य सेश ने से बात करते हुए कहा कि India द्वारा हाल के वर्षों में किए गए मुक्त व्यापार समझौते कृषि उत्पादों के लिए नए निर्यात अवसर पैदा कर सकते हैं, विशेष रूप से मिलेट्स (मोटे अनाज) के लिए. उन्होंने कहा कि बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मिलेट्स कम पानी में उगाए जा सकते हैं, लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और पोषण की दृष्टि से भी अत्यधिक लाभकारी हैं.

सेश ने आगे बताया कि मिलेट्स की मांग केवल India तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इनके लिए बड़ी संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा, “मिलेट्स का उपयोग देश के भीतर तो किया ही जा सकता है, साथ ही इन्हें निर्यात भी किया जा सकता है. आज जिन कई प्रकार के सीरियल बार और स्वास्थ्य उत्पादों का आयात किया जाता है, उनमें मिलेट्स का उपयोग किया जा सकता है.”

उन्होंने बताया कि मिलेट्स की बढ़ती लोकप्रियता का असर बाजार में भी दिखाई दे रहा है और इस वर्ष इनके दामों में लगभग 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि देखने को मिली है.

आदित्य सेश ने Maharashtra को India की कृषि वृद्धि का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए कहा कि राज्य की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियां उसे खाद्यान्न, फल और सब्जियों के उत्पादन में विशेष बढ़त देती हैं. उन्होंने कहा कि भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) जैसी पहलें किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने में मदद कर सकती हैं.

ऊर्जा सुरक्षा के विषय पर उन्होंने कहा कि India को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए ऊर्जा के विविध स्रोत विकसित करने होंगे. उनके अनुसार, वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और भू-Political तनावों के दौर में किसी एक ऊर्जा स्रोत पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है.

सेश ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन (ई20) को बढ़ावा देने का समर्थन करते हुए कहा कि इसके साथ-साथ India को सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइड्रोजन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी निवेश बढ़ाना चाहिए. उनका मानना है कि विविध ऊर्जा पोर्टफोलियो देश को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएगा.

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में लगभग हर वस्तु और संसाधन को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे में India को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाहरी व्यवधान उसकी संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित न कर सकें.

इस बीच, Prime Minister Narendra Modi द्वारा घोषित ‘सप्तधारा’ को देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रोडमैप बताते हुए छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के स्थानीय व्यापारियों ने इसका स्वागत किया. व्यापारियों ने कहा कि Government का सात प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस आने वाले वर्षों में कारोबार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है.

रायगढ़ के कपड़ा व्यापारी विजय छाबड़ा ने से बात करते हुए कहा कि सप्तधारा के तहत मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और एआई, गति शक्ति, रक्षा एवं सिविल डिफेंस, ग्रीन-ब्लू इकॉनमी और India की सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है. मैन्युफैक्चरिंग और स्थानीय वैल्यू चेन मजबूत होने से देश में निवेश बढ़ेगा और छोटे-बड़े व्यापारियों तथा उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे.

वहीं एक अन्य व्यापारी रवि कटारे ने कहा कि यदि Government उद्योगों के लिए रॉ मैटेरियल सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाती है, तो उत्पादन लागत कम होगी, जिसका फायदा व्यापारियों के साथ-साथ आम ग्राहकों को भी मिलेगा और उन्हें सामान अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेगा.

एक अन्य व्यापारी विजय अग्रवाल ने से कहा कि कोरोना महामारी के बाद से कारोबार कई चुनौतियों से गुजर रहा है. विभिन्न सामानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण लागत बढ़ी है, जिसका सीधा असर बाजार और ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ा है. ऐसे में नई उद्योग नीति और सप्तधारा के तहत किए जा रहे प्रयास व्यापार को फिर से गति देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

इसके साथ ही एक अन्य स्थानीय व्यापारी ओमकार सिंह बग्गा ने कहा कि यदि इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जाता है और उद्योगों को जरूरी सुविधाएं एवं सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराया जाता है, तो अगले 5 से 7 साल India की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. इससे देश में उत्पादन, निवेश, रोजगार और व्यापार के अवसरों में तेजी आने की उम्मीद है.

डीबीपी