
बरेली, 4 जून . केरलम में एक निजी जिम द्वारा ‘इस्लाम फ्रेंडली’ दिशा-निर्देशों को अपनाए जाने को लेकर विवाद शुरू हुआ गया है. जहां आलोचक इसे ‘शरिया जिम’ करार देकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं समर्थकों का कहना है कि यह व्यवस्था महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुरूप बनाई गई है. इस मुद्दे पर विभिन्न धार्मिक और Political संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस्लाम महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है. उन्होंने कहा कि जो लोग केरल के इस जिम की व्यवस्था पर आपत्ति जता रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि इस्लामी शिक्षाओं का मूल उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां उनकी इज्जत और हया के साथ कोई समझौता न हो.
मौलाना रजवी ने कहा कि वर्तमान समय में पुरुष और महिलाएं दोनों जिम जाते हैं, लेकिन कई स्थानों पर मिश्रित जिम (मिक्स्ड जिम) होने के कारण विभिन्न प्रकार की घटनाएं और विवाद सामने आते रहे हैं. उनका मानना है कि यदि महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हों और उनके संचालन में भी उसी वर्ग के लोग शामिल हों, तो इस प्रकार की समस्याओं से बचा जा सकता है.
उन्होंने सुझाव दिया कि महिलाओं के जिम का संचालन महिलाओं द्वारा किया जाना चाहिए और वहां पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध होना चाहिए. इसी प्रकार पुरुषों के जिम का संचालन पुरुषों द्वारा किया जाए तथा वहां महिलाओं की आवाजाही सीमित हो. उनके अनुसार, यदि इस प्रकार की पारदर्शी व्यवस्था कायम रहती है तो किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न नहीं होगा. उन्होंने दावा किया कि केरलम के संबंधित जिम ने भी इसी मॉडल को अपनाया है.
केरलम में चल रहे इस विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के शाही मुख्य मुफ्ती मौलाना इफराहीम हुसैन ने भी ‘इस्लाम फ्रेंडली’ जिम की अवधारणा का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद पर राय बनाने से पहले तथ्यों की जांच आवश्यक है. उनके अनुसार यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित जिम में बनाए गए नियम संविधान और कानून के दायरे में हैं या नहीं. यदि सभी व्यवस्थाएं कानूनी और संवैधानिक ढांचे के अनुरूप हैं, तो विवाद का कोई कारण नहीं होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति भी महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और उनके विचारों के आदर पर बल देती है. इसी प्रकार इस्लाम में भी महिलाओं की इज्जत और सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया है. इसलिए यदि किसी संस्था द्वारा इन मूल्यों को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए जाते हैं, तो उन्हें केवल धार्मिक चश्मे से देखने के बजाय सामाजिक संदर्भ में भी समझा जाना चाहिए.
वहीं, इस पूरे विवाद पर Samajwadi Party के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि देश में इस समय कई बड़े मुद्दे मौजूद हैं, जिन पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है. उन्होंने दावा किया कि social media और जनचर्चा में नीट परीक्षा पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी, गैस तथा पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें जैसे विषय लोगों की प्रमुख चिंता बने हुए हैं.
फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े संगठन अक्सर छोटे-छोटे विवादों को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाकर जनता का ध्यान मूल मुद्दों से हटाने का प्रयास करते हैं. उन्होंने कहा कि किसी जिम के संचालन के नियमों और व्यवस्थाओं पर चर्चा हो सकती है और यदि कहीं कोई कानूनी या सामाजिक प्रश्न है तो उस पर बहस भी होनी चाहिए, लेकिन देश के महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि Samajwadi Party Government और सत्तारूढ़ दल को महंगाई, रोजगार, शिक्षा और आर्थिक चुनौतियों जैसे प्रमुख विषयों पर जवाबदेह बनाए रखने का काम करती रहेगी और जनता का ध्यान इन मूलभूत मुद्दों से भटकने नहीं देगी.
दरअसल, केरलम के पलक्कड़ जिले में कुछ दिन पहले प्रमोशनल वीडियो में खुद को ‘इस्लाम फ्रेंडली’ बताया गया है. इसमें जिम मालिक ने दावा किया है कि जिम में तेज संगीत नहीं बजाया जाएगा. इसके अलावा पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग वर्कआउट समय रखा जाएगा.
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एएसएच/डीकेपी
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