नागालैंड: मोन में भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर आठ हुई, मुख्यमंत्री ने जताया दुख

मोन, 19 जुलाई . मोन के उपायुक्त वेन्येई कोन्यक (एनसीएस) ने पुष्टि की है कि लगातार बारिश के बाद मोन कस्बे में असम राइफल्स शिविर के नीचे स्थित नागरिक बस्ती में हुए भूस्खलन में आठ लोगों की जान चली गई. नागालैंड के Chief Minister नेफ्यू रियो ने इस घटना पर दुख जताया है.

Chief Minister रियो ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि Monday को भारी भूस्खलन की बेहद दुखद खबरें मिली हैं. जिन लोगों ने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं. राज्य Government स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है. राष्ट्रीय विकास मंत्रालय (एनएसडीएमए), जिला प्रशासन, डीडीएमए, एसडीआरएफ, Police, एआर और स्थानीय समुदाय खोज एवं बचाव अभियान में जुटे हुए हैं.

वहीं, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के बारे में बात करते हुए डीसी ने कहा कि जिले में विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन हुआ, लेकिन सबसे बड़ी घटना असम राइफल्स शिविर के पीछे हुई, जहां कई घर मलबे के नीचे दब गए.

डीसी ने कहा कि अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. हम केवल चार शव ही निकाल पाए हैं, जबकि चार अन्य अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं. हमारे आकलन के अनुसार, मरने वालों की पुष्टि की गई संख्या आठ है. हालांकि, खोज और बचाव अभियान अभी भी जारी होने के कारण हम अतिरिक्त हताहतों की संभावना से इनकार नहीं कर सकते.

उन्होंने बताया कि Police, असम राइफल्स, प्रादेशिक सेना, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) और अन्य एजेंसियों के कर्मियों को खोज और बचाव अभियान में तैनात किया गया है.

उपायुक्त ने बताया कि भूस्खलन सुबह लगभग 6:00 बजे हुआ, जबकि जिला प्रशासन को इसकी सूचना लगभग 7:30 बजे मिली, जिसके बाद आपातकालीन प्रतिक्रिया दल सक्रिय किए गए.

प्रभावित क्षेत्र को डिफेंस कॉलोनी कहे जाने की खबरों पर स्पष्टीकरण देते हुए उपायुक्त ने कहा कि दोनों नाम असम राइफल्स शिविर के नीचे स्थित एक ही स्थान को संदर्भित करते हैं.

उन्होंने कहा कि लोग इसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं, जिनमें डिफेंस कॉलोनी भी शामिल है. राहत उपायों के बारे में कोन्याक ने बताया कि प्रशासन ने राहत शिविरों की व्यवस्था कर दी है. हालांकि, अधिकांश विस्थापित परिवारों ने रिश्तेदारों के साथ रहना पसंद किया है.

उन्होंने कहा कि हमने राहत शिविर स्थापित किए हैं, लेकिन चूंकि हम नागा हैं, लोग अपने रिश्तेदारों के साथ रहना पसंद करते हैं. विस्थापित परिवारों को उनके रिश्तेदारों ने आश्रय दिया है, और हम स्थिति को संभालने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं.

इस आपदा को प्राकृतिक आपदा बताते हुए डीसी ने कहा कि यह प्रकृति का प्रकोप है, और प्रकृति के हस्तक्षेप को कोई नहीं रोक सकता.

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि अब बारिश रुक चुकी है, लेकिन मौसम में बादल छाए हुए हैं. क्षेत्र में बिजली आपूर्ति भी बाधित है, जिससे संचार प्रभावित हो रहा है.

डीसी ने चल रहे बचाव कार्यों में स्थानीय स्वयंसेवकों के सहयोग की भी सराहना की. वार्ड के स्वयंसेवकों, कोन्याक यूनियन के सदस्यों, कोन्याक छात्र संघ, कोन्याक महिला संगठन और स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा बलों और बचाव दल के साथ मिलकर काम किया है.

एमएस/