
New Delhi, 9 मई . दिल्ली के उपGovernor सरदार तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले जल संशाधनों के कायाकल्प, जीर्णोद्धार और दीर्घकालिक संरक्षण पर दी गई एक विस्तृत प्रस्तुति की समीक्षा की.
यह प्रस्तुति उपGovernor द्वारा लगभग एक सप्ताह पहले डीडीए को दिए गए निर्देशों के बाद दी गई. उपGovernor संधू ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे शहर की उन अमूल्य, लेकिन अतिक्रमण और रखरखाव की कमी के कारण तेजी से खराब हो रही जल संपत्तियों के पुनरुद्धार और जीर्णोद्धार के लिए एक ठोस कार्य योजना को तेजी से लागू करें.
समीक्षा बैठक में उपGovernor को बताया गया कि डीडीए राजधानी भर में 77 जल संशाधनों के कायाकल्प का काम तुरंत शुरू करेगा, जबकि बाकी बचे जल संशाधनों पर काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. इन 77 जल निकायों में से 6 का जीर्णोद्धार अगले 30 दिनों के भीतर, 48 का 60 दिनों के भीतर और बाकी 23 का 90 दिनों के भीतर किया जाएगा. संधू ने निर्देश दिया कि इस संबंध में सभी योजनाएं तुरंत जमीनी स्तर पर लागू की जाएं और उनके पूरा होने के लिए तय समय-सीमा का सख्ती से पालन किया जाए.
जीर्णोद्धार अभियान के पहले चरण में निष्क्रिय जल संशाधनों के वास्तविक कायाकल्प का काम ड्रेजिंग, खुदाई और गाद निकालने के जरिए किया जाएगा. इसके साथ ही उनके जलग्रहण क्षेत्रों की भी सफाई की जाएगी, ताकि उनमें बारिश का पानी ज्यादा से ज्यादा मात्रा में जमा हो सके. डीडीए के एक अधिकारी ने बताया कि एक बार पुनर्जीवित हो जाने के बाद दूसरे चरण में तटबंधों को मज़बूत करने, पौधरोपण, बाड़ लगाने और सौंदर्यीकरण का काम किया जाएगा.
उपGovernor ने कहा कि दिल्ली की झीलें, तालाब और अन्य जलीय पारिस्थितिकी तंत्र अमूल्य पर्यावरणीय संपत्तियां हैं, जो भूजल पुनर्भरण, पारिस्थितिक संतुलन और जलवायु अनुकूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
उपGovernor ने एक्स पर लिखा, “गर्मियों की शुरुआत के साथ ही मैंने डीडीए द्वारा दी गई एक प्रजेंटेशन की समीक्षा की. यह प्रजेंटेशन मेरे उन निर्देशों के आधार पर तैयार की गई थी, जिनमें दिल्ली की अनमोल, लेकिन तेजी से खराब हो रही जल संशाधनों के पुनरुद्धार और जीर्णोद्धार के लिए एक ठोस कार्ययोजना को तेजी से लागू करने की बात कही गई थी.
डीडीए तत्काल 77 जल-निकायों पर काम शुरू कर रहा है. इनमें से 6 का जीर्णोद्धार अगले 30 दिनों के भीतर, 48 का 60 दिनों के भीतर और शेष 23 का 90 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा.
इसके अलावा विकास से जुड़ी कुछ अन्य महत्वपूर्ण पहलों पर भी चर्चा की गई. विशेष रूप से उन पहलों पर जिनका उद्देश्य द्वारका, रोहिणी और नरेला जैसी उप-नगरियों में आमूलचूल परिवर्तन लाना है. मैंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी योजनाओं को तत्काल प्रभाव से लागू करना सुनिश्चित करें. साथ ही उनके लिए निर्धारित समय-सीमाओं का पूरी सख्ती से पालन करें.”
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ओपी/
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