
New Delhi, 23 जुलाई . India में टेक्स्ट मैसेज (एसएमएस) आधारित धोखाधड़ी और मोबाइल फ्रॉड के मामलों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 2025 की दूसरी छमाही से 2026 की पहली छमाही के दौरान, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में एसएमएस स्कैम में 146 प्रतिशत और मोबाइल फ्रॉड में 67 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई.
बायोकैच की रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल फ्रॉड में यह बढ़ोतरी आईओएस डिवाइस पर 86 प्रतिशत और एंड्रॉयड डिवाइस पर 35 प्रतिशत रही.
रिपोर्ट में कहा गया है कि धोखाधड़ी अब पहले की तुलना में अधिक तेज और महंगी होती जा रही है. जोखिमपूर्ण भुगतान की संख्या दोगुनी हो गई है, जबकि फ्रॉड सत्रों की औसत अवधि 32 प्रतिशत घट गई है. वहीं, प्रत्येक फ्रॉड सत्र में औसत ट्रांसफर राशि 1.7 गुना बढ़ गई है.
इस बीच, वेब ब्राउजर आधारित फ्रॉड में 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे स्पष्ट होता है कि साइबर अपराधी अब तेजी से मोबाइल प्लेटफॉर्म को निशाना बना रहे हैं.
जांच एजेंसियों ने 2025 के दौरान India के विभिन्न बैंकों की 700 से अधिक शाखाओं में 8.5 लाख से ज्यादा म्यूल अकाउंट की पहचान की.
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में India में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों में शामिल कुल मूल्य 22,496 करोड़ रुपए तक पहुंच गया. इसी अवधि में 26.48 लाख म्यूल अकाउंट के मामले सामने आए, जबकि संदिग्ध रजिस्ट्री मदद से 9,055 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन को रोका गया.
बायोकैच के ग्लोबल फ्रॉड इंटेलिजेंस निदेशक टॉम पीकॉक ने कहा, “एसएमएस स्कैम इसलिए बेहद प्रभावी होते हैं क्योंकि वे भरोसेमंद संचार माध्यम का फायदा उठाते हैं. इससे फर्जी संदेश भी असली लगते हैं और लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे कार्रवाई कर बैठते हैं.”
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि धोखाधड़ी वाले भुगतान प्रयासों के कुल मूल्य में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि औसत कॉल अवधि 31 प्रतिशत और फ्रॉड सत्रों की औसत अवधि 32 प्रतिशत घट गई है.
पीकॉक ने कहा, “उच्च मूल्य वाले फ्रॉड प्रयासों और कम समय में पूरी होने वाली कॉल एवं सत्र यह दिखाते हैं कि साइबर अपराधी पहले से कहीं अधिक कुशल हो गए हैं.”
उन्होंने कहा, “धोखाधड़ी के तरीके लगातार अधिक आधुनिक होते जा रहे हैं. अपराधी अब सुनियोजित सोशल इंजीनियरिंग और स्वचालित तकनीकों का इस्तेमाल कर पीड़ितों को गुमराह करते हैं और चेतावनी संकेत सामने आने से पहले ही उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं.”
रिपोर्ट के अनुसार, India में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई), मोबाइल बैंकिंग, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म के तेजी से बढ़ते उपयोग ने देश में एक मजबूत डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम तैयार किया है, लेकिन यही व्यवस्था साइबर ठगों के लिए भी आकर्षक लक्ष्य बन गई है.
बायोकैच के ग्लोबल एडवाइजरी निदेशक सुभाशीष बोस ने कहा, “सकारात्मक बात यह है कि बैंकों, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है.”
उन्होंने कहा, “व्यवहार आधारित इंटेलिजेंस बैंकों को केवल एक बार की पहचान सत्यापन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उपयोगकर्ता की मंशा का लगातार आकलन करने में मदद करती है. इससे बैंक धोखाधड़ी की जल्द पहचान कर तेजी से कार्रवाई कर सकते हैं.”
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एबीएस
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