साइबर सेल ने हरियाणा से 85 लाख की ठगी गिरोह के आरोपी को किया गिरफ्तार

नोएडा, 19 मई . गौतमबुद्धनगर Police की साइबर क्राइम टीम ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए 85 लाख रुपए की ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े एक अहम आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी की गिरफ्तारी Haryana के गुरुग्राम से की गई है.

Police जांच में सामने आया है कि आरोपी मोबाइल कंपनी का पीओएस एजेंट था और उसने भारतीय सिम को ई-सिम के रूप में एक्टिवेट कर उसे कंबोडिया में संचालित साइबर अपराधियों तक पहुंचाया था. वहीं से इस सिम का इस्तेमाल कर लोगों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का शिकार बनाया जा रहा था.

Police के मुताबिक, थाना साइबर क्राइम नोएडा में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान पता चला कि पीड़ित को खुद को Police, सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर डराया गया और डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर उससे 85 लाख रुपए की ठगी कर ली गई.

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना Police ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मैनुअल इंटेलिजेंस के जरिए जांच शुरू की. जांच में खुलासा हुआ कि जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट की ठगी में किया गया था, वह एक भारतीय सिम थी, जिसे ई-सिम के रूप में एक्टिवेट किया गया था. यह काम एक पीओएस एजेंट द्वारा किया गया था.

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर Police आरोपी तक पहुंची और 18 मई को गुरुग्राम से उसे गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपी की पहचान सूरज पुत्र फूल सिंह निवासी पानीपत, Haryana के रूप में हुई है. आरोपी की उम्र 26 वर्ष बताई गई है और वह 10वीं पास है.

Police के मुताबिक, आरोपी ने लालच में आकर भारतीय सिम को विदेश में उपयोग के लिए सक्रिय किया, जिसका इस्तेमाल कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट जैसे गंभीर साइबर अपराध को अंजाम देने में किया. इस मामले में थाना साइबर क्राइम गौतमबुद्धनगर में आईटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है.

Police अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है. Police ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को Police, सीबीआई या ईडी अधिकारी बताकर पैसे मांगने वालों पर विश्वास न करें. किसी भी अज्ञात लिंक, स्क्रीन शेयरिंग ऐप या मोबाइल एक्सेस रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें. साथ ही ओटीपी, बैंक डिटेल्स, यूपीआई पिन और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें.

पीकेटी/डीकेपी