जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपरा देश की अनोखी पहचान : अर्जुन मुंडा

New Delhi, 24 मई . दिल्ली में आयोजित भव्य ‘जनजातीय संस्कृतिक समागम’ में देशभर से पहुंचे जनजातीय समुदायों के लोगों ने अपनी संस्कृति, परंपरा और एकता का शानदार प्रदर्शन किया. ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में नेताओं और जनजातीय संगठनों ने जनजातीय पहचान, संस्कृति संरक्षण और समाज की चुनौतियों पर जोर दिया.

Jharkhand के पूर्व Chief Minister अर्जुन मुंडा ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा, “बिरसा मुंडा और कई अन्य बहादुर आदिवासी योद्धाओं की ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभा को संबोधित किया और पूरे India में आदिवासी समुदायों को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने अतीत में आदिवासी समाजों द्वारा दिए गए योगदानों की सराहना की और आदिवासी कल्याण के लिए India Government द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों, साथ ही भविष्य के लिए उसके दृष्टिकोण पर चर्चा की. इसके साथ ही, उन्होंने लोगों को हानिकारक प्रभावों से दूर रहते हुए आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रोत्साहित किया. Union Minister ने इस बात का जिक्र किया कि आदिवासी समुदायों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, वैचारिक जड़ों और प्राचीन विरासत को संरक्षित रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि India की आदिवासी पहचान का अनूठा स्वरूप अक्षुण्ण बना रहे.”

पूर्व Chief Minister अर्जुन मुंडा ने कहा कि देशभर से जनजातीय समाज का इस तरह एक जगह जुटना सिर्फ आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा संदेश है. उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज अपनी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं की वजह से देश में अलग पहचान रखता है.

अर्जुन मुंडा ने कहा कि जनजातीय समाज हमेशा अपनी संस्कृति को बचाकर रखने की परंपरा निभाता आया है, और आज भी आदिवासी समुदाय अपनी पहचान और विरासत पर गर्व करता है.

‘जनजाति सुरक्षा मंच’ के सदस्य मनोहर संथाल ने कहा कि यह दिन जनजातीय समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि समाज के विकास और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा.

मनोहर संथाल ने बताया कि इस कार्यक्रम में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के साथ-साथ नागालैंड, मेघालय और सिक्किम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. उन्होंने कहा कि केवल संथाल समुदाय के ही करीब 2500 से 3000 लोग कार्यक्रम में शामिल हुए.

कार्यक्रम में पहुंचे लोग पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में नजर आए. मनोहर संथाल ने कहा कि पारंपरिक पहनावा, खानपान और जीवनशैली ही जनजातीय समाज की असली पहचान है.

वहीं, ‘जनजाति सुरक्षा मंच’ के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि वह उन लोगों को नमन करते हैं, जो अपनी मेहनत की कमाई खर्च कर और भीषण गर्मी में दिल्ली पहुंचकर बिरसा मुंडा की जयंती मना रहे हैं. उन्होंने कहा कि धर्मांतरण जनजातीय समाज के सामने एक बड़ी समस्या बन चुका है और भगवान बिरसा मुंडा ने इसी मुद्दे के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था.

भाजपा नेता इंदर भगत ने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में जनजातीय समाज एक मंच पर एकत्र हुआ है. उन्होंने बताया कि देश की 705 जनजातियों में से 550 से अधिक समुदायों के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जो पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश है.

डीकेपी