तुंगनाथ मंदिर के खुले कपाट, दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

रुद्रप्रयाग, 22 अप्रैल . उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित पवित्र तुंगनाथ मंदिर के कपाट Wednesday से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं. इसके साथ ही पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला. Wednesday सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ चोपता और आसपास के इलाकों में उमड़ पड़ी थी, जो बाबा तुंगनाथ के दर्शन के लिए उत्साहित नजर आए.

पंच केदारों में तीसरे केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान तुंगनाथ धाम की चल विग्रह डोली 20 अप्रैल को अपने शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ से विधि-विधान के साथ रवाना हुई थी. इस यात्रा के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया और स्थानीय ग्रामीणों ने पुरखी मेला भी आयोजित किया, जहां नए अन्न का भोग भगवान तुंगनाथ को अर्पित किया गया.

डोली 20 अप्रैल की रात भूतनाथ मंदिर में विश्राम के बाद 21 अप्रैल को आगे बढ़ी और विभिन्न पड़ावों से होते हुए चोपता पहुंची. यहां रात्रि विश्राम के बाद Wednesday सुबह लगभग 8:30 बजे डोली को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ तुंगनाथ धाम के लिए रवाना किया गया. करीब 11 बजे मंदिर के कपाट आगामी यात्रा वर्ष 2026 के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोल दिए गए.

स्थानीय पुरोहित प्रकाश पुरोहित ने बताया कि यह यात्रा पूरी तरह पारंपरिक और धार्मिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न हुई है. उन्होंने देश-विदेश के श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में तुंगनाथ धाम आएं और इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनें.

वहीं, पूर्व विधायक मनोज रावत भी इस अवसर पर दर्शन करने पहुंचे. इस दौरान से बातचीत में उन्होंने कहा कि चोपता क्षेत्र में हर दिन हजारों पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं, लेकिन यहां बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है. खासकर सार्वजनिक शौचालय न होने को उन्होंने गंभीर समस्या बताया. उनका कहना है कि जब Government इस क्षेत्र को पर्यटन और डेस्टिनेशन के रूप में बढ़ावा दे रही है, तो यहां सुविधाओं का विकास भी उतना ही जरूरी है.

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि वन विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग मिलकर इस समस्या का समाधान करें. उन्होंने यह भी कहा कि यदि यहां सरकारी भवन और सुरक्षा ढांचे बन सकते हैं, तो सार्वजनिक सुविधाएं भी बननी चाहिए. टैक्स वसूली के बावजूद सुविधाओं की कमी पर उन्होंने सवाल उठाए और इसे तुरंत सुधारने की जरूरत बताई.

पीआईएम/पीएम