
बलिया, 7 अगस्त . बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और रसड़ा से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह को Friday को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. उनकी अंतिम यात्रा Political दलों की सीमाओं से ऊपर उठकर जनश्रद्धा का प्रतीक बन गई. हजारों लोगों की मौजूदगी, रास्ते भर उमड़े जनसैलाब और नम आंखों के बीच गंगा तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया. बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का पार्थिव शरीर Thursday देर रात उनके पैतृक गांव खनवर (नगरा, बलिया) पहुंचा, जहां अंतिम दर्शन के लिए देर रात से ही लोगों का तांता लग गया.
Friday सुबह उनके आवास से अंतिम यात्रा शुरू हुई तो “जब तक सूरज-चांद रहेगा, भैया तेरा नाम रहेगा” और “उमाशंकर सिंह अमर रहें” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा. हल्की बारिश के बावजूद अंतिम यात्रा में विभिन्न Political दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों की भारी भीड़ शामिल रही. करीब सात घंटे में शवयात्रा श्रीरामपुर घाट पहुंची. इस दौरान जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर और श्रद्धासुमन अर्पित कर अपने लोकप्रिय जनप्रतिनिधि को अंतिम विदाई दी. गंगा तट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. उनके पुत्र प्रिंस यूकेश सिंह ने मुखाग्नि दी. मुखाग्नि देने के बाद वह भावुक होकर फफक पड़े.
जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और Police अधीक्षक ओमवीर सिंह ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. अंतिम यात्रा में बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, सुभासपा विधायक हंसूराम, पूर्व मंत्री नारद राय, भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्र सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की. उत्तर प्रदेश Government में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी मौजूद रहे, जो उमाशंकर सिंह के समधी हैं.
दिनेश प्रताप सिंह ने social media मंच एक्स पर लिखा कि जिन लोगों ने उमाशंकर सिंह की कमाई को उनके लॉकर और बैंक खातों में तलाशने की कोशिश की, उन्हें बलिया की जनता की आंखों के आंसू और उनके प्रति उमड़े जनसैलाब को देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोगों के दिलों में कमाई गई यह पूंजी किसी भी लॉकर में बंद नहीं की जा सकती. उन्होंने अंतिम संस्कार के बाद कहा कि उमाशंकर सिंह की सबसे बड़ी संपत्ति जनता का स्नेह और विश्वास था. उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में लोगों की निस्वार्थ सेवा की थी.
बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का Wednesday रात New Delhi के फोर्टिस अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया था. वह 55 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे. 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के खनवर गांव में जन्मे उमाशंकर सिंह किसान परिवार से थे. उनके पिता घुरहू सिंह भारतीय सेना में कार्यरत रहे. प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने जनता इंटर कॉलेज, नगरा से इंटरमीडिएट और सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया से स्नातक किया. छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले उमाशंकर सिंह वर्ष 1990-91 में छात्रसंघ के महामंत्री रहे. वर्ष 2000 में जिला पंचायत सदस्य चुने गए और 2012 में पहली बार रसड़ा से विधायक बने. इसके बाद 2017 और 2022 में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज की.
उनके निधन पर Chief Minister योगी आदित्यनाथ, बसपा प्रमुख मायावती, Samajwadi Party के अध्यक्ष अखिलेश यादव, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित कई प्रमुख नेताओं ने शोक व्यक्त किया. राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने भावुक होकर कहा, “दुनिया ने क्या देखा, यह मैं नहीं जानता लेकिन आज बलिया की जनता ने उमाशंकर सिंह जी की सेवाओं का सम्मान जिस तरह किया, वह उनकी सबसे बड़ी पूंजी थी. अंतिम यात्रा जिस-जिस रास्ते से गुजरी, वहां लाखों लोग नम आंखों और झुके हुए सिर के साथ उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए खड़े दिखाई दिए. निस्वार्थ भाव से की गई सेवा का ऐसा सम्मान बहुत कम लोगों को नसीब होता है.
–
विकेटी/पीएम
Skip to content