
तिरुवनंतपुरम, 28 मई . केरल के पूर्व Chief Minister और वर्तमान विपक्ष के नेता पिनराई विजयन की बेटी टी. वीणा विजयन से जुड़े सीएमआरएल-एक्सालॉजिक वित्तीय लेनदेन मामले में Enforcement Directorate (ईडी) की जांच तेज होने के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. विपक्ष और आलोचक सीपीआई(एम) पर नेताओं के परिजनों से जुड़े मामलों में “दोहरे मापदंड” अपनाने का आरोप लगा रहे हैं.
विवाद की जड़ वर्ष 2020 के उस मामले से जुड़ी है, जब ईडी ने दिवंगत सीपीआई(एम) नेता कोडियरी बालकृष्णन के बेटे बिनीश कोडियरी के खिलाफ जांच की थी. उस समय कोडियरी बालकृष्णन ने सार्वजनिक रूप से खुद और पार्टी को मामले से अलग रखते हुए कहा था कि यदि उनके बेटे ने कोई गलत काम किया है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने इसे व्यक्तिगत कानूनी मामला बताया था, जिसमें पार्टी हस्तक्षेप नहीं करेगी.
तत्कालीन Chief Minister पिनराई विजयन ने भी उस समय संयमित रुख अपनाते हुए कहा था कि जांच एजेंसी के पास क्या सबूत हैं, यह जाने बिना किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता और यदि कोई गलत काम साबित होता है तो संबंधित परिवार कानूनी रूप से उसका सामना करेगा.
हालांकि, अब जब ईडी की जांच उनकी बेटी वीणा विजयन और उनके आवास तक पहुंच गई है, तो सीपीआई(एम) का रवैया पूरी तरह बदला हुआ दिखाई दे रहा है. वीणा विजयन और उनकी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस से जुड़े ठिकानों पर ईडी की छापेमारी के कुछ ही घंटों के भीतर पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए, आपात बैठकें बुलाई गईं और शीर्ष नेताओं ने जांच एजेंसी के खिलाफ तीखा Political हमला शुरू कर दिया.
सीपीआई(एम) के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने ईडी की कार्रवाई को Political रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह पिनराई विजयन और पार्टी को कमजोर करने की अंतिम कोशिश है.
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब बिनीश कोडियरी स्वयं ईडी की कार्रवाई के विरोध में पिनराई विजयन के आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नजर आए. उन्होंने कहा, “पिनराई विजयन का परिवार भी मेरा पार्टी परिवार है. यह सोचने का समय नहीं है कि मेरे मुश्किल दौर में किसने क्या प्रतिक्रिया दी थी.”
ईडी ने अब तक इस मामले से जुड़े 242 बैंक खातों में मौजूद लगभग 18.36 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कर दी है. साथ ही डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और वीणा विजयन का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है. केरल और Bengaluru में समन्वित छापेमारी के दौरान यह कार्रवाई की गई.
गौरतलब है कि बिनीश कोडियरी को वर्ष 2023 में कर्नाटक हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी, लेकिन इसके बावजूद उनकी सीपीआई(एम) सदस्यता बहाल करने की मांग को अब तक राज्य नेतृत्व ने स्वीकार नहीं किया है. यही तथ्य अब पार्टी के खिलाफ उठ रहे दोहरे मापदंड के आरोपों को और हवा दे रहा है.
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डीएससी
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