उग्रवाद, कट्टरता और हिंसा बढ़ावा देने वाले देशों को खुद भी इन खतरों का सामना करना पड़ता

नई दिल्ली (New Delhi) .काबुल में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद सबसे ज्यादा सवाल पाकिस्तान की भूमिका पर ही उठ रहे हैं.पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान उन चुनिंदा वैश्विक नेताओं में से हैं, जो तालिबान सरकार की लगातार वकालत कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध ना लगाने की अपील कर रहे हैं. कजाकिस्तान पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने पाकिस्तान को फिर आतंकवाद पर कड़े शब्दों में संदेश दिया. जयशंकर ने पाकिस्तान के दोस्त चीन को भी दूसरे देशों में परियोजनाओं के नाम पर अपना प्रोपैगेंडा ना चलाने की सलाह दी.

जयशंकर ने पाकिस्तान को टारगेट करते हुए कहा कि उग्रवाद, कट्टरता और हिंसा जैसे तत्वों को बढ़ावा देने वाले देशों को खुद भी इनके खतरों को झेलना पड़ता है.चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ड एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) पर भी निशाना साधा है.उन्होंने कहा कि सभी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के केंद्र में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए.बता दें कि इसके पहले भी भारत ने बीआरआई के तहत आने वाले चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (सीपीईसी) पर भी विरोध जताया था क्योंकि इस प्रोजेक्ट का एक प्रमुख हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है.

जयशंकर ने कहा कि सीआईसीए के सदस्यों का सामान्य लक्ष्य विकास और शांति है और इस लक्ष्य का सबसे बड़ा दुश्मन आतंकवाद है.बता दें कि सीआईसीए एक मल्टीनेशनल फोरम है, जो एशिया में सुरक्षा और स्थिरता को प्रमोट करने के लिए साल 1999 में कजाकिस्तान के नेतृत्व में स्थापित हुआ था.विदेश मंत्री ने कहा, आज के आधुनिक दौर में कोई देश आतंकवाद का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ नहीं कर सकता है.सीमा-पार आतंकवाद भी आतंकवाद का एक रूप है. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस खतरे के खिलाफ एकजुट होनाकर इस उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए जैसा जलवायु परिवर्तन और कोरोना महामारी (Epidemic) के मुद्दों को लिया जाता हैं.

जयशंकर ने कहा कि कट्टरता, उग्रवाद, हिंसा और धर्मांधता जैसे तत्वों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करना एक बहुत ही छोटी सोच का नतीजा है, क्योंकि ये पलटकर उन्हीं देशों को परेशान जरूर करती हैं जो इन्हें बढ़ावा देते हैं. इस क्षेत्र में स्थिरता की कोई भी कमी कोविड-19 (Covid-19) को नियंत्रण में लाने के सामूहिक प्रयासों को कमजोर कर देगी.इस कारण है कि अफगानिस्तान की स्थिति इसलिए भी हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय होनी चाहिए.

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